अवैध इमारतों पर अग्निमित्रा पॉल का एक्शन, अफसरों से पूछा- निर्माण के वक्त आप कहां थे?

पश्चिम बंगाल में अवैध इमारतों के खिलाफ सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने अधिकारियों की बैठक में अवैध निर्माण की वीडियो फुटेज दिखाकर जमकर सवाल किए और पूछा कि जब नियमों को ताक पर रखकर बहुमंजिला इमारतें बनाई जा रही थीं, तब संबंधित अधिकारी कहां थे। कोलकाता, साउथ दमदम, हावड़ा और बारानगर में ऑडिट के दौरान 27 इमारतों में नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आया है। कई जगह कम मंजिल की अनुमति लेकर उससे दोगुनी मंजिलें बना दी गईं और कुछ इमारतों में फायर सेफ्टी व इमरजेंसी एग्जिट की व्यवस्था भी नहीं मिली। सरकार ने साफ किया है कि अवैध निर्माण के लिए बिल्डरों के साथ लापरवाह अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी और लोगों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा।

Aug 14, 2026 - 11:51
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अवैध इमारतों पर अग्निमित्रा पॉल का एक्शन, अफसरों से पूछा- निर्माण के वक्त आप कहां थे?

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में अवैध निर्माण के खिलाफ सरकार ने सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है। शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने अधिकारियों की बैठक में कोलकाता और आसपास के इलाकों में बनीं गैरकानूनी इमारतों को लेकर तीखे सवाल पूछे। मंत्री ने अधिकारियों को अवैध इमारतों के वीडियो दिखाते हुए पूछा कि जब ये बहुमंजिला इमारतें नियमों को ताक पर रखकर बनाई जा रही थीं, तब संबंधित अधिकारी कहां थे और उन्होंने निर्माण को रोकने के लिए समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की।

अग्निमित्रा पॉल ने बैठक में साफ किया कि शहर में अवैध निर्माण को केवल बिल्डिंग मालिक या बिल्डर की जिम्मेदारी बताकर मामला खत्म नहीं किया जा सकता। जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी निर्माण की निगरानी करने और नियमों का पालन सुनिश्चित कराने की है, उनकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सरकार लोगों की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी और लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

13 मई की आग के बाद शुरू हुआ अवैध निर्माण का ऑडिट

पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार बनने के तुरंत बाद 13 मई को कोलकाता की एक इमारत में भीषण आग लगने की घटना सामने आई थी। इस हादसे में आठ लोगों की मौत हो गई थी। घटना की जांच के दौरान कथित तौर पर यह सामने आया कि संबंधित इमारत का नक्शा स्वीकृत नहीं था और बिना जरूरी मंजूरी के पांच मंजिला निर्माण खड़ा कर दिया गया था। इस घटना ने शहर में अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

इस हादसे के बाद शुभेंदु अधिकारी सरकार ने कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों में इमारतों का ऑडिट कराने का फैसला किया। सरकार का उद्देश्य यह पता लगाना था कि कितनी इमारतें स्वीकृत नक्शे और निर्धारित निर्माण नियमों के अनुसार बनी हैं और कहां नियमों का उल्लंघन हुआ है।

ऑडिट में 27 इमारतें मिलीं अवैध

ऑडिट के दौरान साउथ दमदम, हावड़ा और बारानगर समेत कई इलाकों में कुल 27 इमारतें कथित तौर पर नियमों के खिलाफ पाई गईं। जांच में ऐसे मामले सामने आए जहां इमारत के लिए सीमित मंजिलों का नक्शा पास कराया गया था, लेकिन निर्माण के बाद उससे कहीं ज्यादा फ्लोर बना दिए गए।

कई मामलों में तीन मंजिल के निर्माण की अनुमति लेकर छह मंजिल तक इमारतें खड़ी कर दी गईं। इतना ही नहीं, इन इमारतों में बने फ्लैट भी लोगों को बेच दिए गए। गंभीर चिंता की बात यह बताई गई कि कई ऐसी इमारतों में पर्याप्त फायर सेफ्टी व्यवस्था और आपातकालीन निकासी की सुविधा तक मौजूद नहीं थी।

13 मंजिला अवैध इमारत का वीडियो बनवाया

अग्निमित्रा पॉल ने अधिकारियों को केवल कागजी रिपोर्ट दिखाने के बजाय अवैध निर्माण की वास्तविक स्थिति सामने रखने के लिए कई इमारतों के वीडियो भी बनवाए। साउथ दमदम नगरपालिका क्षेत्र में एक 13 मंजिला इमारत का निर्माण भी सामने आया, जिसे मंत्री के अनुसार पूरी तरह गैरकानूनी बताया गया।

इसके बाद मंत्री ने संबंधित अधिकारियों की बैठक बुलाई और एक-एक अधिकारी को उसके क्षेत्र में मौजूद कथित अवैध इमारतों के वीडियो दिखाए। उन्होंने सवाल किया कि इतनी बड़ी इमारतें जब निर्माणाधीन थीं, तब संबंधित विभाग के अधिकारी क्या कर रहे थे। उनका सवाल सीधे तौर पर प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था पर था।

‘अवैध निर्माण रोकना अफसरों की भी जिम्मेदारी’

मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि अवैध निर्माण के लिए केवल बिल्डरों और मकान मालिकों को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है। यदि किसी इलाके में बिना अनुमति या स्वीकृत नक्शे से अलग निर्माण कई मंजिल तक पहुंच जाता है, तो उस दौरान निगरानी करने वाले अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि शहर में अवैध निर्माण को बढ़ावा देने या उसे नजरअंदाज करने वाले बिल्डरों और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार का उद्देश्य केवल हादसे के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि अवैध निर्माण को शुरुआत में ही रोकना है।

हादसे के बाद मालिक को जिम्मेदार बताने की परंपरा पर सवाल

अवैध इमारतों के मामलों में अक्सर हादसा होने के बाद यह सामने आता है कि बिल्डिंग का नक्शा स्वीकृत नहीं था, निर्धारित मंजिलों से ज्यादा निर्माण किया गया था या फायर सेफ्टी नियमों का पालन नहीं हुआ था। इसके बाद आम तौर पर बिल्डिंग मालिक या बिल्डर को जिम्मेदार ठहराया जाता है।

लेकिन इस पूरे मामले में बंगाल सरकार ने एक अलग सवाल उठाया है कि यदि निर्माण नियमों के खिलाफ हो रहा था तो संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों ने उसे समय रहते क्यों नहीं रोका। सरकार अब इसी पहलू पर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

कोलकाता में पहले भी सामने आ चुके हैं बड़े अग्निकांड

कोलकाता में अवैध या असुरक्षित इमारतों को लेकर पहले भी कई गंभीर घटनाएं सामने आ चुकी हैं। पिछले साल अप्रैल में शहर के एक होटल में भीषण आग लगने से 14 लोगों की मौत हुई थी। इस तरह की घटनाओं ने इमारतों में फायर सेफ्टी, आपातकालीन निकासी और निर्माण नियमों के पालन को लेकर लगातार सवाल खड़े किए हैं।

अब अग्निमित्रा पॉल की ओर से अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की कोशिश को इसी व्यापक सुरक्षा व्यवस्था से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार का कहना है कि लोगों की जान की सुरक्षा के लिए निर्माण शुरू होने से लेकर पूरा होने तक नियमों की निगरानी जरूरी है।

अब बिल्डर के साथ अफसरों पर भी नजर

बंगाल सरकार के इस कदम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि अवैध निर्माण की जिम्मेदारी केवल बिल्डर या संपत्ति मालिक तक सीमित नहीं रखी जाएगी। यदि किसी इलाके में नियमों के खिलाफ बहुमंजिला इमारत खड़ी हो जाती है और संबंधित विभाग को इसकी जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होती, तो प्रशासनिक स्तर पर भी जवाबदेही तय करने की कोशिश की जाएगी।

अग्निमित्रा पॉल ने अधिकारियों को यह संदेश दे दिया है कि भविष्य में किसी हादसे के बाद केवल यह बताना पर्याप्त नहीं होगा कि इमारत का नक्शा पास नहीं था या फायर सेफ्टी नियमों का पालन नहीं हुआ था। सरकार अब यह भी जानना चाहती है कि जब अवैध निर्माण हो रहा था, तब उसे रोकने की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी क्या कर रहे थे। यही सवाल पश्चिम बंगाल में अवैध निर्माण के खिलाफ सरकार की नई कार्रवाई का केंद्र बन गया है।

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