पेपर लीक बिल पर बहस के बीच लोकसभा में हंगामा, कई दिलचस्प मोमेंट्स
एंटी पेपर लीक बिल पर लोकसभा में हुई बहस के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जहां महुआ मोइत्रा, अभिषेक बनर्जी, प्रियंका गांधी और किरेन रिजिजू के बयान चर्चा का केंद्र बने।
लोकसभा में मंगलवार को 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा शुरू हुई। देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए लाए गए इस विधेयक पर सदन में करीब आठ घंटे की चर्चा तय की गई। बहस के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई बार तीखी नोकझोंक हुई और सदन का माहौल काफी गर्म दिखाई दिया। विधेयक पर चर्चा के साथ-साथ कई ऐसे घटनाक्रम भी सामने आए, जिन्होंने पूरे दिन संसद की कार्यवाही को सुर्खियों में बनाए रखा।
चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी समेत विपक्षी नेताओं ने सरकार को परीक्षा प्रणाली, छात्रों के भविष्य और पेपर लीक की घटनाओं को लेकर घेरा। वहीं सत्ता पक्ष ने इस विधेयक को परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम बताया। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के कारण कई बार सदन में शोर-शराबा भी देखने को मिला।
बहस के दौरान भारतीय जनता पार्टी की सांसद बांसुरी स्वराज ने अपने भाषण में प्रसिद्ध शायर दुष्यंत कुमार की कविता का उल्लेख किया। उन्होंने कविता के माध्यम से सरकार के पक्ष को मजबूती से रखने का प्रयास किया। इसके जवाब में कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने भी अपने संबोधन में मशहूर कवि गोपालदास 'नीरज' को याद करते हुए कविता के जरिए अपनी बात रखी। दोनों नेताओं के भाषणों में साहित्यिक अंदाज ने सदन का ध्यान आकर्षित किया।
कार्यवाही के दौरान एक दिलचस्प मोड़ उस समय आया जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद अभिषेक बनर्जी अपनी बात रखने के लिए खड़े हुए। उनके बोलना शुरू करते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच शोर-शराबा बढ़ गया, जिससे उनकी बात सुनने में कठिनाई होने लगी। सदन में लगातार बढ़ते शोर के कारण कुछ समय के लिए कार्यवाही का माहौल तनावपूर्ण हो गया।
इसी दौरान टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा अपनी सीट से खड़ी हो गईं और पीठासीन अधिकारी से हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने कहा कि शोर मचाने वालों को रोका जाए ताकि "सरसा" यानी चर्चा ठीक से हो सके। उनके इस बयान ने सदन में मौजूद सांसदों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
"सरसा" शब्द का प्रयोग संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और उस समय सदन की कार्यवाही का संचालन कर रहे पीठासीन अधिकारी दिलीप सैकिया अक्सर अपने भाषणों में करते रहे हैं। दोनों नेताओं के हिंदी उच्चारण का अंदाज थोड़ा अलग माना जाता है। महुआ मोइत्रा द्वारा इसी शब्द का इस्तेमाल किए जाने के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा शुरू हो गई कि उन्होंने यह टिप्पणी किरेन रिजिजू और पीठासीन अधिकारी के उच्चारण का मजाक उड़ाने के लिए की थी। हालांकि इस पर उनकी ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया।
सदन में लगातार बढ़ते शोर और व्यवधान के बीच पीठासीन अधिकारी ने कई बार सांसदों से संयम बनाए रखने और व्यवस्थित तरीके से चर्चा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण विधेयक पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए और सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलेगा, इसलिए अनावश्यक व्यवधान से बचना चाहिए।
एंटी पेपर लीक बिल को लेकर सरकार का कहना है कि यह कानून सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली धांधली, प्रश्नपत्र लीक और संगठित परीक्षा अपराधों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। वहीं विपक्ष का आरोप है कि केवल कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि सरकार को परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और जवाबदेही भी सुनिश्चित करनी होगी।
दिनभर चली चर्चा के दौरान संसद में कई ऐसे पल देखने को मिले, जिन्होंने राजनीतिक बहस के साथ-साथ संसदीय कार्यवाही को भी रोचक बना दिया। कविता, तंज, तीखी बयानबाजी, विरोध और हंगामे के बीच एंटी पेपर लीक बिल पर बहस ने संसद के मॉनसून सत्र को एक बार फिर राजनीतिक रूप से बेहद चर्चित बना दिया। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि चर्चा पूरी होने के बाद इस महत्वपूर्ण विधेयक पर सदन क्या फैसला लेता है।
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