डर और अफवाहों के बीच आत्मनिर्भर भारत की कहानी: PM मोदी ने गिनाईं 12 साल की उपलब्धियां

80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए कोरोना महामारी, वैश्विक युद्ध, ऊर्जा संकट और खाद-पेट्रोल की कमी को लेकर फैलाई गई आशंकाओं का जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि संकट के दौर में कुछ लोगों ने देश को डराने और चिंतित रखने की कोशिश की, लेकिन भारत ने अपनी नीतियों और आत्मनिर्भरता के दम पर हर चुनौती का सामना किया। उन्होंने गैस पाइपलाइन के विस्तार, सौर ऊर्जा क्षमता, पीएम सूर्य घर योजना और रेलवे विद्युतीकरण समेत पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियां गिनाईं। प्रधानमंत्री ने बताया कि पाइप वाली गैस की पहुंच 70 से बढ़कर करीब 700 शहरों तक हुई है और सोलर एनर्जी के क्षेत्र में भारत ने बड़ी छलांग लगाई है। साथ ही 50 लाख घरों में सोलर एनर्जी अपनाने के माइलस्टोन का भी उल्लेख किया।

Aug 15, 2026 - 11:42
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डर और अफवाहों के बीच आत्मनिर्भर भारत की कहानी: PM मोदी ने गिनाईं 12 साल की उपलब्धियां

नई दिल्ली: 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की विकास यात्रा, आत्मनिर्भरता और बीते वर्षों में सामने आई बड़ी चुनौतियों का विस्तार से उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना महामारी से लेकर वैश्विक युद्ध, ऊर्जा संकट और जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता तक, अलग-अलग मौकों पर देश के सामने कई तरह की चुनौतियां खड़ी हुईं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों को देश में डर और चिंता का माहौल बनाए रखने में आनंद आता था और इसी वजह से वैक्सीन, पेट्रोल, गैस और खाद जैसी जरूरी चीजों को लेकर लगातार आशंकाएं और अफवाहें फैलाई गईं। पीएम मोदी के मुताबिक, इन चुनौतियों के बावजूद भारत ने अपनी नीतियों, तैयारी और आत्मनिर्भरता के बल पर परिस्थितियों का सामना किया और विकास की रफ्तार को बनाए रखा।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कोरोना महामारी के दौर को याद करते हुए कहा कि उस समय पूरी दुनिया अभूतपूर्व संकट से गुजर रही थी। स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव था, सप्लाई चेन प्रभावित थी और जरूरी सामान की उपलब्धता को लेकर चिंता थी। भारत के सामने करोड़ों लोगों की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ वैक्सीन और स्वास्थ्य संबंधी संसाधनों की व्यवस्था करने की चुनौती थी। पीएम मोदी ने कहा कि संकट के उस दौर में भी देश ने अपनी क्षमता विकसित करने पर जोर दिया और बाद में आत्मनिर्भरता की सोच को और मजबूत किया गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना के बाद वैश्विक परिस्थितियां सामान्य होने से पहले ही दुनिया को युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव जैसी नई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इन परिस्थितियों का असर ऊर्जा बाजार, कच्चे तेल की कीमतों, गैस और अन्य जरूरी वस्तुओं की सप्लाई पर पड़ा। भारत जैसे बड़े और ऊर्जा की भारी मांग वाले देश के लिए यह चुनौती और महत्वपूर्ण थी। पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे दौर में भारत ने अपनी जरूरतों और घरेलू क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए नीतियां बनाईं और संकट के बावजूद आम लोगों के हितों को प्राथमिकता दी।

अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने उन लोगों पर भी निशाना साधा, जो उनके मुताबिक संकट के समय देश को डराने का काम करते थे। उन्होंने कहा कि कभी वैक्सीन को लेकर सवाल खड़े किए गए, कभी पेट्रोल और गैस की कमी की आशंका जताई गई और कभी खाद की उपलब्धता को लेकर किसानों में चिंता पैदा करने की कोशिश की गई। पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने केवल चुनौतियों का सामना ही नहीं किया बल्कि कई क्षेत्रों में अपनी क्षमता को पहले के मुकाबले काफी बढ़ाया है।

प्रधानमंत्री ने इस दौरान गैस कनेक्शन और पाइपलाइन नेटवर्क के विस्तार को सरकार की बड़ी उपलब्धियों में गिनाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से पहले देश में पाइप के जरिए गैस पहुंचाने की सुविधा लगभग 70 शहरों तक सीमित थी, लेकिन पिछले 12 वर्षों में इसे बढ़ाकर करीब 700 शहरों तक पहुंचाया गया है। पीएम मोदी ने इसे बड़े पैमाने पर किए गए काम और विकास की तेज रफ्तार का उदाहरण बताया।

उन्होंने घरों तक पाइप वाली गैस पहुंचने के आंकड़ों का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री के मुताबिक, 2014 से पहले पाइप वाली गैस की सुविधा करीब 20 से 22 लाख घरों तक पहुंचती थी, जबकि अब यह संख्या लगभग 1.75 करोड़ घरों तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि गैस के बुनियादी ढांचे के विस्तार का सीधा असर आम परिवारों की सुविधा और ऊर्जा के विकल्पों पर पड़ता है। सरकार लंबे समय से शहरों और घरों तक स्वच्छ ईंधन की पहुंच बढ़ाने पर जोर देती रही है।

प्रधानमंत्री ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की प्रगति को भी अपने भाषण का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया। उन्होंने कहा कि लगभग 12 साल पहले देश की सौर ऊर्जा क्षमता करीब 2 गीगावाट थी, जबकि अब भारत ने 160 गीगावाट की क्षमता का लक्ष्य हासिल कर लिया है। उन्होंने इसे ऊर्जा क्षेत्र में हुए बड़े बदलाव के तौर पर पेश किया और कहा कि सौर ऊर्जा को केवल बड़े उद्योगों तक सीमित रखने के बजाय इसका लाभ मध्यम वर्ग और सामान्य परिवारों तक पहुंचाने पर भी सरकार ने ध्यान दिया है।

इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री ने 'पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस योजना के जरिए घरों की छतों पर सोलर सिस्टम लगाने को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे परिवार अपनी बिजली की जरूरतों का एक हिस्सा स्वयं पूरा कर सकें और बिजली के खर्च को कम करने में मदद मिल सके। पीएम मोदी ने कहा कि कम समय में ही 50 लाख घरों में सोलर एनर्जी अपनाने का माइलस्टोन पार किया गया है और यह अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है।

पीएम सूर्य घर योजना का व्यापक उद्देश्य घरेलू स्तर पर रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देना है। इसके तहत पात्र परिवारों को सोलर पैनल लगाने के लिए सरकारी सहायता और सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। सरकार का जोर इससे बिजली के बिल में राहत देने, स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ाने और देश की ऊर्जा जरूरतों में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने पर है। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में इसे आम परिवारों को ऊर्जा के क्षेत्र में अधिक सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

प्रधानमंत्री ने ऊर्जा क्षेत्र के साथ-साथ रेलवे के विद्युतीकरण को भी भारत की बदलती तस्वीर का हिस्सा बताया। रेलवे विद्युतीकरण से डीजल पर निर्भरता कम करने, परिचालन लागत को नियंत्रित करने और परिवहन क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ाने में मदद मिलती है। मोदी ने अपने संबोधन में ऐसे कई क्षेत्रों का उल्लेख किया, जहां सरकार के अनुसार पिछले वर्षों में बुनियादी ढांचे और क्षमता का विस्तार हुआ है।

अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियां लगातार बदल रही हैं और किसी भी देश के लिए जरूरी है कि वह महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी घरेलू क्षमताओं को मजबूत करे। ऊर्जा, खाद्य, स्वास्थ्य, विनिर्माण और तकनीक जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता को उन्होंने भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए जरूरी बताया।

खाद की उपलब्धता को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि संकट के समय किसानों की जरूरतों को लेकर भी तरह-तरह की आशंकाएं पैदा की गईं। कृषि के लिए उर्वरकों की निरंतर उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इसकी कमी का सीधा असर बुवाई और उत्पादन पर पड़ सकता है। सरकार ने खाद की आपूर्ति बनाए रखने, घरेलू उत्पादन बढ़ाने और वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के बीच किसानों को राहत देने के लिए कई कदम उठाए हैं। पीएम मोदी ने अपने भाषण में इसे भी देश की संकट प्रबंधन क्षमता से जोड़कर देखा।

पेट्रोल और ऊर्जा संकट का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक स्तर पर युद्ध और तनाव का असर पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर पड़ा। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति से जुड़ी अनिश्चितता का प्रभाव आयात पर निर्भर देशों पर पड़ता है। भारत ने ऐसे दौर में ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने, नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने और घरेलू क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लगातार मजबूत करना होगा।

मोदी ने अपने संबोधन में विकास को केवल बड़े आंकड़ों तक सीमित नहीं बताया, बल्कि इसे आम नागरिक की जिंदगी से जोड़ने की कोशिश की। गैस की उपलब्धता, घरों में सौर ऊर्जा, बिजली की सुविधा, रेलवे का विद्युतीकरण और ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव जैसे उदाहरणों के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि बुनियादी ढांचे में बदलाव का असर सीधे परिवारों और आम लोगों के जीवन पर पड़ता है।

80वें स्वतंत्रता दिवस के भाषण में प्रधानमंत्री का मुख्य संदेश यही रहा कि संकट के समय डर और आशंका के बजाय तैयारी, आत्मनिर्भरता और मजबूत नीति की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में भारत ने महामारी, वैश्विक संघर्ष और ऊर्जा संकट जैसी परिस्थितियों के बीच अपनी क्षमताओं को बढ़ाने का प्रयास किया है। साथ ही उन्होंने सरकार की विभिन्न योजनाओं और उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश अब पहले के मुकाबले ज्यादा तैयार और आत्मविश्वासी है।

प्रधानमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में भारत की ऊर्जा जरूरतों और विकास के बीच संतुलन बनाना बड़ी प्राथमिकता होगी। बढ़ती आबादी, शहरीकरण, औद्योगिकीकरण और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ बिजली और ईंधन की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सौर ऊर्जा, अन्य नवीकरणीय स्रोतों, विद्युतीकरण और आधुनिक ऊर्जा ढांचे का विस्तार भारत की दीर्घकालिक रणनीति का अहम हिस्सा बन सकता है।

कुल मिलाकर, लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 80वां स्वतंत्रता दिवस संबोधन चुनौतियों और उपलब्धियों के मिश्रण पर केंद्रित रहा। उन्होंने कोरोना से लेकर वैश्विक युद्ध और ऊर्जा संकट तक के कठिन दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने डर और अनिश्चितता के माहौल के बावजूद अपनी क्षमताओं को मजबूत किया। गैस नेटवर्क के विस्तार से लेकर सौर ऊर्जा और पीएम सूर्य घर योजना तक के आंकड़े गिनाते हुए प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत की दिशा में सरकार के प्रयासों को सामने रखा। उनका जोर इस बात पर रहा कि भारत केवल संकट से निकलने वाला देश नहीं, बल्कि संकटों के बीच अपनी नई क्षमता और विकास की दिशा तैयार करने वाला देश बन रहा है।

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