बंगाल में स्मार्ट मीटर योजना की रफ्तार धीमी, 2.07 करोड़ उपभोक्ताओं में सिर्फ 2.91% घरों तक पहुंचा मीटर
पश्चिम बंगाल में स्मार्ट मीटर लगाने की योजना की रफ्तार को लेकर संसद में पेश आंकड़ों ने चिंता बढ़ा दी है। RDSS के तहत राज्य के करीब 2.07 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर स्वीकृत किए गए हैं, लेकिन 30 जून 2026 तक सिर्फ 6,02,982 यानी 2.91 प्रतिशत मीटर ही लगाए जा सके। वहीं, DT मीटरों की स्थापना 28.41 प्रतिशत और फीडर मीटरों का लक्ष्य 100 प्रतिशत पूरा हो चुका है। आखिर उपभोक्ता स्तर पर स्मार्ट मीटर लगाने की गति इतनी धीमी क्यों है और इसका बंगाल की बिजली व्यवस्था पर क्या असर पड़ सकता है? जानिए पूरी कहानी।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में बिजली व्यवस्था को आधुनिक बनाने और बिजली वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी एवं कुशल बनाने के लिए शुरू की गई स्मार्ट मीटर योजना की प्रगति बेहद धीमी दिखाई दे रही है। संसद में केंद्र सरकार की ओर से पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में करीब 2.07 करोड़ उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर लगाने की मंजूरी दी गई है, लेकिन 30 जून 2026 तक इनमें से केवल 6,02,982 स्मार्ट मीटर ही लगाए जा सके हैं। यानी कुल स्वीकृत उपभोक्ता मीटरों में महज 2.91 प्रतिशत ही स्थापित हुए हैं।
यह जानकारी राज्यसभा में भाजपा सांसद विश्वजीत सिन्हा उर्फ राहुल सिन्हा की ओर से पूछे गए सवाल के लिखित जवाब में सामने आई। केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने स्मार्ट मीटर लगाने की प्रगति से जुड़े आंकड़े संसद के उच्च सदन में रखे। केंद्रीय विद्युत राज्यमंत्री श्रीपाद नाईक की ओर से दिए गए जवाब में पश्चिम बंगाल में रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम यानी RDSS के तहत स्मार्ट मीटर लगाने की स्थिति बताई गई।
2.07 करोड़ उपभोक्ताओं के मुकाबले सिर्फ 6 लाख मीटर
मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पश्चिम बंगाल में कुल 2,07,17,969 उपभोक्ता स्मार्ट मीटरों की मंजूरी दी गई है। इसके मुकाबले 30 जून 2026 तक केवल 6,02,982 स्मार्ट मीटर लगाए गए। यह कुल स्वीकृत उपभोक्ता मीटरों का सिर्फ 2.91 प्रतिशत है। आंकड़े बताते हैं कि योजना की मंजूरी और जमीन पर उसके क्रियान्वयन के बीच अभी काफी बड़ा अंतर बना हुआ है।
स्मार्ट मीटरों की धीमी स्थापना का असर राज्य में बिजली वितरण व्यवस्था के आधुनिकीकरण की गति पर भी पड़ सकता है। इतनी बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं तक स्मार्ट मीटर पहुंचाने के लिए व्यापक स्तर पर खरीद, टेंडर, इंस्टॉलेशन और तकनीकी व्यवस्था की जरूरत होती है। मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि इस दिशा में काम अभी शुरुआती चरण में है।
सिर्फ 40.35 लाख मीटरों के लिए हुआ अनुबंध
संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार राज्य में उपभोक्ता मीटर, डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर यानी DT मीटर और फीडर मीटर को मिलाकर कुल 2,10,35,262 स्मार्ट मीटरों की मंजूरी दी गई है। हालांकि शुरुआती चरण में पश्चिम बंगाल ने इनमें से केवल 40,35,262 स्मार्ट मीटरों के लिए ही अनुबंध आवंटित किए हैं।
इसका मतलब यह है कि बड़ी संख्या में स्वीकृत स्मार्ट मीटरों के मुकाबले अभी तक कॉन्ट्रैक्ट आवंटन भी सीमित स्तर पर हुआ है। ऐसे में केवल मीटर लगाने की प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि उसके पहले की खरीद और अनुबंध प्रक्रिया भी योजना की गति को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण पहलू है।
उपभोक्ता मीटरों की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक
उपभोक्ता मीटरों की श्रेणी में सबसे बड़ा अंतर दिखाई देता है। कुल 2,07,17,969 मीटरों की मंजूरी के मुकाबले 37,17,969 मीटरों के लिए आवंटन किया गया है। लेकिन 30 जून 2026 तक वास्तव में केवल 6,02,982 मीटर ही लगाए जा सके।
इस हिसाब से स्वीकृत लक्ष्य का केवल 2.91 प्रतिशत हिस्सा ही पूरा हुआ है। राज्य में करोड़ों बिजली उपभोक्ता होने के कारण स्मार्ट मीटरिंग को बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है।
DT मीटर लगाने में उपभोक्ता मीटरों से बेहतर स्थिति
डिस्ट्रिब्यूशन ट्रांसफॉर्मर यानी DT मीटरों के मामले में प्रगति उपभोक्ता मीटरों की तुलना में बेहतर है। राज्य में कुल 3,05,419 DT मीटरों को मंजूरी दी गई थी। इनमें से 86,772 मीटर यानी करीब 28.41 प्रतिशत मीटर 30 जून 2026 तक स्थापित किए जा चुके थे।
हालांकि यह प्रगति उपभोक्ता मीटरों से काफी अधिक है, लेकिन यहां भी कुल स्वीकृत संख्या के मुकाबले अभी बड़ी संख्या में मीटर लगाए जाने बाकी हैं। DT मीटर बिजली वितरण नेटवर्क में ट्रांसफॉर्मर स्तर पर बिजली की निगरानी और वितरण से जुड़ी जानकारी जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
फीडर मीटरों में लक्ष्य पूरा
फीडर मीटरों की स्थिति बाकी दोनों श्रेणियों से अलग है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पश्चिम बंगाल में 11,874 फीडर मीटरों की मंजूरी दी गई थी, जबकि 30 जून 2026 तक 11,917 फीडर मीटर लगाए जा चुके थे। इस तरह फीडर मीटर लगाने में 100 प्रतिशत लक्ष्य पूरा होने का आंकड़ा सामने आया है।
फीडर स्तर पर स्मार्ट मीटरिंग पूरी होने के बावजूद उपभोक्ता स्तर पर स्मार्ट मीटरों की बेहद कम स्थापना यह दिखाती है कि योजना के अलग-अलग हिस्सों में प्रगति समान नहीं है। सबसे बड़ी चुनौती करोड़ों घरेलू और अन्य बिजली उपभोक्ताओं तक स्मार्ट मीटर पहुंचाने की है।
RDSS के तहत स्मार्ट मीटर क्यों महत्वपूर्ण हैं?
रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम का उद्देश्य बिजली वितरण व्यवस्था को मजबूत करना, तकनीकी और वाणिज्यिक नुकसान को कम करना तथा बिजली वितरण कंपनियों की कार्यक्षमता में सुधार करना है। स्मार्ट मीटर इस पूरी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं।
स्मार्ट मीटर के जरिए बिजली की खपत को अधिक सटीक तरीके से रिकॉर्ड किया जा सकता है। इससे मीटर रीडिंग की पारंपरिक प्रक्रिया पर निर्भरता कम हो सकती है और उपभोक्ता की बिजली खपत से संबंधित जानकारी अधिक तेजी से उपलब्ध हो सकती है। इसके अलावा बिजली वितरण कंपनियों को मांग और खपत के पैटर्न को समझने में भी मदद मिल सकती है।
बिजली चोरी और वितरण नुकसान पर भी नजर
स्मार्ट मीटरिंग का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य बिजली वितरण व्यवस्था में होने वाले तकनीकी और वाणिज्यिक नुकसान को कम करना भी है। डिजिटल मीटरिंग से बिजली की खपत और सप्लाई से संबंधित डेटा अधिक व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध हो सकता है। इससे वितरण कंपनियों को अनियमितताओं और असामान्य खपत पैटर्न की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि इसका वास्तविक फायदा तभी व्यापक स्तर पर दिखाई देगा, जब बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार पश्चिम बंगाल अभी उस स्तर से काफी दूर है।
बंगाल में चुनौती सिर्फ मीटर लगाने की नहीं
राज्य में स्मार्ट मीटरिंग को बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए सिर्फ मीटर उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए वितरण कंपनियों, ठेकेदारों, तकनीकी कर्मचारियों और उपभोक्ताओं के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत होगी। मीटर की खरीद और स्थापना के साथ-साथ डेटा प्रबंधन, नेटवर्क कनेक्टिविटी और शिकायत निवारण जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूत करना होगा।
करोड़ों उपभोक्ताओं वाले राज्य में यह एक बड़ा प्रशासनिक और तकनीकी अभियान है। इसलिए योजना को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए अनुबंध आवंटन और वास्तविक इंस्टॉलेशन के बीच के अंतर को कम करना भी जरूरी होगा।
संसद में सामने आए आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
संसद में पेश आंकड़ों के बाद पश्चिम बंगाल में स्मार्ट मीटर योजना की गति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। एक तरफ राज्य के लिए 2 करोड़ से ज्यादा उपभोक्ता स्मार्ट मीटरों को मंजूरी मिली है, वहीं दूसरी तरफ 30 जून 2026 तक सिर्फ करीब 6 लाख मीटर ही लगाए जा सके हैं।
फीडर मीटरों में 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल होना और DT मीटरों में करीब 28 प्रतिशत स्थापना यह दिखाती है कि कुछ स्तरों पर काम आगे बढ़ा है, लेकिन उपभोक्ता मीटरों की स्थापना अभी बेहद पीछे है। आने वाले समय में योजना की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि राज्य करोड़ों उपभोक्ताओं तक स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया को कितनी तेजी से आगे बढ़ाता है।
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