लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर गरमाई बहस, सरकार-विपक्ष आमने-सामने
लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई, जिसमें प्रियंका गांधी और बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने छात्रों, परीक्षा सुधार और सरकार की जवाबदेही को लेकर अपने-अपने पक्ष रखे।
लोकसभा में आज एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा की शुरुआत हो गई। इस महत्वपूर्ण विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। शुरुआत में इस बिल पर चर्चा के लिए छह घंटे का समय निर्धारित किया गया था, लेकिन विपक्ष की ओर से अधिक समय की मांग किए जाने पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो छह घंटे ही नहीं, बल्कि दस घंटे तक भी इस विषय पर चर्चा कराई जा सकती है।
एंटी पेपर लीक बिल को सरकार सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बता रही है। हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। ऐसे में सरकार का कहना है कि यह विधेयक परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाया गया है।
लोकसभा की कार्यवाही के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि केवल कैमरे का एंगल बदलने से काम नहीं चलेगा, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को "दिल का एंगल" बदलना पड़ेगा। उनके इस बयान के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्ष ने सरकार पर छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया और परीक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों को लेकर जवाब मांगा।
वहीं, भारतीय जनता पार्टी के सांसद तेजस्वी सूर्या ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि पूरे देश के युवा संसद की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों को इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि पहले किस सरकार के दौरान क्या हुआ, बल्कि वे भविष्य की परीक्षाओं को निष्पक्ष और पारदर्शी देखना चाहते हैं। उनके अनुसार शिक्षा समाज में आगे बढ़ने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है और सामान्य परिवारों के बच्चों के लिए प्रतियोगी परीक्षाएं ही सफलता का सबसे बड़ा रास्ता होती हैं।
तेजस्वी सूर्या ने कहा कि शिक्षा और परीक्षा ऐसी व्यवस्था है जहां किसी छात्र से उसका सरनेम, जाति या पारिवारिक पृष्ठभूमि नहीं पूछी जाती, बल्कि केवल उसकी मेहनत और प्रतिभा के आधार पर अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि जब किसी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होता है तो यह केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि मेहनत करने वाले लाखों छात्रों के साथ विश्वासघात होता है।
उन्होंने संसद में कहा कि नीट पेपर लीक मामले के सामने आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं इसे "पाप" बताया था और सरकार ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। उनके अनुसार मामले में एफआईआर दर्ज की गई, जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी गई, कई आरोपियों की गिरफ्तारियां हुईं और प्रभावित छात्रों के हित में दोबारा परीक्षा (री-नीट) कराई गई। साथ ही परिणाम भी समय पर घोषित किए गए ताकि छात्रों का शैक्षणिक भविष्य प्रभावित न हो।
बीजेपी सांसद ने आगे कहा कि सरकार ने केवल जांच तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि परीक्षा प्रणाली में दीर्घकालिक सुधारों की दिशा में भी कदम उठाए। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने जेईई की तर्ज पर परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने की घोषणा की तथा व्यापक सुधारों के सुझाव देने के लिए एक हाईपावर कमेटी का गठन किया। उन्होंने कहा कि इन्हीं सुधारों को कानूनी मजबूती देने के लिए एंटी पेपर लीक बिल संसद में लाया गया है।
तेजस्वी सूर्या ने कांग्रेस पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वर्ष 2010 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार ने भी इसी तरह का एक विधेयक पेश किया था। उन्होंने प्रियंका गांधी से पूछा कि जब उस समय ऐसा बिल लाया गया था, तब उसे संसद से पारित क्यों नहीं कराया गया। उन्होंने कहा कि यदि उस समय प्रभावी कानून बन गया होता, तो शायद बाद के वर्षों में कई पेपर लीक की घटनाओं पर पहले ही अंकुश लगाया जा सकता था।
उन्होंने यह भी कहा कि स्वतंत्र भारत के 75 वर्षों के इतिहास में कई बार प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं सामने आई हैं। पिछले 20 वर्षों में देशभर में 200 से अधिक पेपर लीक के मामले दर्ज हुए हैं। ऐसे में इस समस्या को किसी एक सरकार तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता, बल्कि सभी दलों को मिलकर परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।
संसद में हुई बहस के दौरान सत्ता पक्ष ने इस विधेयक को छात्रों के हित में ऐतिहासिक कदम बताया, जबकि विपक्ष ने सरकार से जवाबदेही और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों की मांग की। दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्कों के साथ छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।
देशभर के लाखों प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों की नजर अब इस विधेयक पर टिकी हुई है। यदि यह बिल संसद से पारित होता है, तो सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, संगठित नकल और अन्य अनियमितताओं पर सख्त कानूनी कार्रवाई का रास्ता मजबूत होगा। ऐसे में लोकसभा में चल रही यह बहस केवल एक विधेयक तक सीमित नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और छात्रों के भविष्य से जुड़ा एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और सामाजिक विमर्श भी बन गई है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)