NCERT में 1,596 और CBSE में 933 पद खाली, संसदीय समिति ने जताई गंभीर चिंता; परीक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल
NCERT और CBSE में बड़ी संख्या में पद खाली होने का मामला सामने आने के बाद शिक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। संसदीय समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2025 तक NCERT में 2,844 स्वीकृत पदों में से 1,596 पद खाली थे, जबकि CBSE में 2,117 स्वीकृत पदों में 933 पद रिक्त पड़े हैं। NCERT में प्रशासनिक और सहायक पदों की कमी सबसे ज्यादा है, वहीं CBSE में ग्रुप ‘C’ के 595 पद खाली हैं। समिति ने कहा कि कर्मचारियों की कमी के कारण शिक्षा नीति, प्रशासनिक कामकाज और खास तौर पर बोर्ड परीक्षाओं की सुरक्षा व सुचारू संचालन पर असर पड़ सकता है। समिति ने CBSE को परीक्षा से जुड़े संवेदनशील कार्यों में अस्थायी कर्मचारियों पर निर्भरता कम करने और समयबद्ध तरीके से स्थायी नियुक्तियां करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि CBSE से संबद्ध स्कूलों की संख्या 1992-93 के 3,787 से बढ़कर 2024-25 में 31,234 हो गई है और लाखों छात्र हर साल बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होते हैं। ऐसे में अब इन रिक्त पदों को जल्द भरना शिक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी प्राथमिकता बन गया है।
नई दिल्ली: देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी दो प्रमुख संस्थाओं NCERT और CBSE में बड़ी संख्या में पद खाली होने का मामला सामने आया है। संसदीय समिति ने इन दोनों संस्थानों में कर्मचारियों की भारी कमी पर गंभीर चिंता जताई है। समिति के अनुसार, अक्टूबर 2025 तक NCERT में स्वीकृत 2,844 पदों में से सिर्फ 1,248 पदों पर कर्मचारी कार्यरत थे, जबकि 1,596 पद खाली पड़े थे। वहीं, CBSE में स्वीकृत 2,117 पदों में से 933 पद यानी करीब 44 प्रतिशत पद रिक्त हैं। समिति ने सरकार और संबंधित संस्थानों से इन रिक्तियों को जल्द भरने के लिए ठोस और समयबद्ध कदम उठाने की सिफारिश की है।
यह मामला अनुमान समिति (2026-27) की 10वीं रिपोर्ट में सामने आया है, जिसमें केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की समीक्षा के साथ देश में सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने से जुड़े बजट और नीतिगत पहलुओं का भी अध्ययन किया गया। समिति ने कहा कि देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में NCERT और CBSE की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में इन संस्थानों में लंबे समय तक बड़ी संख्या में पदों का खाली रहना प्रशासनिक क्षमता और शिक्षा की गुणवत्ता दोनों के लिए चिंता का विषय है।
NCERT में आधे से ज्यादा पद खाली
संसदीय समिति ने NCERT में रिक्त पदों की स्थिति को विशेष रूप से गंभीर बताया है। अक्टूबर 2025 तक NCERT में कुल 2,844 स्वीकृत पद थे, लेकिन इनमें से केवल 1,248 पदों पर कर्मचारी कार्यरत थे। इसका मतलब है कि कुल स्वीकृत पदों में से 1,596 पद खाली थे।
रिक्त पदों की श्रेणी पर नजर डालें तो NCERT में 145 शैक्षणिक पद, 131 स्कूली शिक्षण पद, 916 प्रशासनिक पद और 404 सहायक पद खाली थे। यानी सबसे बड़ी कमी प्रशासनिक और सहायक स्तर के कर्मचारियों की है। समिति ने माना कि इतने बड़े पैमाने पर रिक्तियां संस्थान के नियमित कामकाज पर असर डाल सकती हैं।
शिक्षा नीति बनाने में NCERT की अहम भूमिका
NCERT देश की शिक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण संस्थान है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 सहित देश में शैक्षिक नीतियों और पाठ्यक्रम से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों में इसकी भूमिका रहती है। पाठ्यक्रम विकास, शैक्षिक अनुसंधान, शिक्षक प्रशिक्षण, पाठ्यपुस्तकों और विभिन्न शैक्षणिक संसाधनों के विकास में NCERT की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
ऐसे में संसदीय समिति ने सवाल उठाया है कि जब संस्थान के स्वीकृत पदों में से आधे से अधिक खाली हों, तो उसके कामकाज पर इसका प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है। समिति ने मंत्रालय से इस मामले पर तत्काल ध्यान देने और विभिन्न श्रेणियों के रिक्त पदों को भरने के लिए गंभीर प्रयास करने को कहा है।
प्रशासनिक पदों की सबसे बड़ी कमी
NCERT में रिक्तियों का आंकड़ा बताता है कि सबसे अधिक कमी प्रशासनिक कर्मचारियों की है। कुल 1,596 रिक्तियों में 916 प्रशासनिक पद शामिल हैं। इसके अलावा 404 सहायक पद भी खाली हैं।
प्रशासनिक और सहायक कर्मचारियों की कमी का असर संस्थान के रोजमर्रा के कामकाज, दस्तावेजी प्रक्रियाओं, परियोजनाओं, समन्वय और अन्य संस्थागत गतिविधियों पर पड़ सकता है। समिति का मानना है कि NCERT जैसे राष्ट्रीय स्तर के शिक्षा संस्थान के प्रभावी संचालन के लिए पर्याप्त स्थायी कर्मचारियों की उपलब्धता जरूरी है।
CBSE में भी 933 पद रिक्त
NCERT के बाद संसदीय समिति ने CBSE में 933 रिक्त पदों को लेकर भी गंभीर चिंता जताई है। CBSE में कुल 2,117 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 933 पद खाली हैं। यह कुल स्वीकृत पदों का लगभग 44 प्रतिशत है।
समिति के अनुसार CBSE में सबसे ज्यादा कमी ग्रुप ‘C’ के सहायक कर्मचारियों की है। इस श्रेणी में 595 पद खाली हैं। समिति ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए कहा कि CBSE अपने नियमित कामकाज को चलाने के लिए अस्थायी और संविदा कर्मचारियों पर निर्भर है।
संविदा कर्मचारियों पर निर्भरता को लेकर चिंता
संसदीय समिति ने CBSE के संवेदनशील और महत्वपूर्ण कार्यों के लिए अस्थायी कर्मचारियों पर निर्भरता को लेकर विशेष चिंता जताई है। CBSE देश के सबसे बड़े स्कूल शिक्षा बोर्डों में से एक है और हर साल लाखों विद्यार्थी इसकी बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होते हैं।
समिति ने CBSE को स्पष्ट सिफारिश की है कि परीक्षाओं से जुड़े संवेदनशील कार्यों के लिए अस्थायी संविदा कर्मचारियों पर निर्भरता कम या समाप्त की जाए। इसके लिए स्थायी कर्मचारियों की समयबद्ध और त्वरित भर्ती की जानी चाहिए, ताकि परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और सुरक्षा से किसी तरह का समझौता न हो।
बोर्ड परीक्षाओं की सुरक्षा पर उठे सवाल
CBSE में कर्मचारियों की कमी को लेकर समिति की सबसे बड़ी चिंता बोर्ड परीक्षाओं के सुचारू संचालन से जुड़ी है। देशभर में लाखों विद्यार्थी CBSE की कक्षा 10 और 12 की परीक्षाओं में शामिल होते हैं। ऐसे में परीक्षा से जुड़े संवेदनशील कामों में पर्याप्त प्रशिक्षित और स्थायी कर्मचारियों की मौजूदगी महत्वपूर्ण होती है।
समिति ने आशंका जताई कि स्थायी कर्मचारियों की कमी और संवेदनशील कार्यों के लिए अस्थायी कर्मचारियों पर निर्भरता से प्रमुख राष्ट्रीय बोर्ड परीक्षाओं की सुरक्षा, गुणवत्ता और सुचारू संचालन पर असर पड़ सकता है। इसलिए समिति ने रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरने की सिफारिश की है।
CBSE का लगातार बढ़ता दायरा
संसदीय समिति ने CBSE के बढ़ते दायरे का भी उल्लेख किया है। रिपोर्ट के अनुसार, CBSE से संबद्ध स्कूलों की संख्या 1992-93 में 3,787 थी, जो बढ़कर 2024-25 में 31,234 हो गई। यानी तीन दशकों से अधिक समय में CBSE से संबद्ध स्कूलों की संख्या में कई गुना वृद्धि हुई है।
CBSE के विस्तार के साथ उसके प्रशासनिक कामकाज और विद्यार्थियों से जुड़ी जिम्मेदारियां भी बढ़ी हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़ी संख्या में स्कूल CBSE से संबद्ध हैं और इन संस्थानों से जुड़े छात्रों, शिक्षकों तथा अभिभावकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए बोर्ड को लगातार बड़े स्तर पर काम करना पड़ता है।
25 क्षेत्रीय और 5 उप-क्षेत्रीय कार्यालयों से हो रहा काम
बढ़ते दायरे को संभालने के लिए CBSE वर्तमान में 25 क्षेत्रीय कार्यालयों और पांच उप-क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से अपने कामकाज का संचालन कर रहा है। इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि बोर्ड की प्रशासनिक जिम्मेदारियां कितनी व्यापक हो चुकी हैं।
जब संस्थान का दायरा लगातार बढ़ रहा हो और उससे जुड़े स्कूलों तथा विद्यार्थियों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही हो, तब कर्मचारियों की कमी एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक चुनौती बन जाती है। संसदीय समिति ने इसी परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए रिक्त पदों को जल्द भरने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
लाखों छात्र CBSE बोर्ड परीक्षाओं में होते हैं शामिल
CBSE के बढ़ते दायरे का असर विद्यार्थियों की संख्या में भी दिखाई देता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि कक्षा 12वीं में छात्रों की संख्या 17 लाख से अधिक और कक्षा 10वीं में छात्रों की संख्या 23 लाख से अधिक हो चुकी है।
इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की बोर्ड परीक्षा आयोजित करना अपने आप में एक विशाल प्रशासनिक प्रक्रिया है। प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था, मूल्यांकन, परिणाम तैयार करने और प्रमाणपत्र जारी करने तक कई स्तरों पर बड़ी संख्या में कर्मचारियों और अधिकारियों की आवश्यकता होती है।
CBSE को मंत्रालय से नहीं मिलता अनुदान
संसदीय समिति ने यह भी उल्लेख किया है कि CBSE एक स्व-वित्तपोषित स्वायत्त निकाय है और इसे मंत्रालय से कोई अनुदान प्राप्त नहीं होता। ऐसे में बोर्ड को अपने वित्तीय संसाधनों के आधार पर ही अपने प्रशासनिक और संस्थागत खर्चों को पूरा करना होता है।
समिति के सामने यह पहलू भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि एक तरफ CBSE का दायरा लगातार बढ़ रहा है, स्कूलों और विद्यार्थियों की संख्या में बड़ी वृद्धि हुई है, जबकि दूसरी तरफ स्वीकृत पदों में से करीब 44 प्रतिशत पद खाली हैं। ऐसे में मानव संसाधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना बोर्ड के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बन गया है।
समिति ने सरकार से क्या कहा?
संसदीय समिति ने NCERT और CBSE दोनों में रिक्त पदों को जल्द भरने पर जोर दिया है। NCERT के मामले में समिति ने मंत्रालय से तत्काल ध्यान देने और सभी स्तरों पर रिक्तियों को भरने के लिए गंभीर प्रयास करने की बात कही है।
CBSE के मामले में समिति ने विशेष रूप से समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया अपनाने की सिफारिश की है। समिति का कहना है कि संवेदनशील परीक्षा संबंधी कामों में अस्थायी कर्मचारियों पर निर्भरता कम की जानी चाहिए और स्थायी कर्मचारियों की नियुक्ति की जानी चाहिए।
शिक्षा व्यवस्था के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
NCERT और CBSE दोनों ही देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। NCERT पाठ्यक्रम, शैक्षिक अनुसंधान और शिक्षक प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जबकि CBSE देशभर में संबद्ध स्कूलों की बोर्ड परीक्षाओं और शैक्षणिक प्रशासन से जुड़े बड़े स्तर के कार्य संभालता है।
ऐसे संस्थानों में बड़ी संख्या में पद खाली रहने का असर केवल कर्मचारियों के काम के बोझ तक सीमित नहीं रह सकता। इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया, प्रशासनिक काम, शैक्षिक परियोजनाओं, परीक्षा प्रबंधन और विद्यार्थियों से जुड़ी सेवाओं की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है।
अब रिक्त पदों को भरना बड़ी चुनौती
संसदीय समिति की रिपोर्ट के बाद अब शिक्षा मंत्रालय और संबंधित संस्थानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन रिक्तियों को जल्द से जल्द भरने की होगी। NCERT में 1,596 और CBSE में 933 पद खाली होने का आंकड़ा बताता है कि दोनों संस्थानों में मानव संसाधन की समस्या काफी बड़ी है।
खास तौर पर CBSE में लाखों विद्यार्थियों की बोर्ड परीक्षाओं और हजारों संबद्ध स्कूलों के बढ़ते प्रशासनिक दायरे को देखते हुए स्थायी कर्मचारियों की पर्याप्त संख्या जरूरी है। वहीं NCERT के लिए भी शिक्षा नीति, पाठ्यक्रम और अनुसंधान से जुड़े कामों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के लिए विशेषज्ञ और प्रशासनिक कर्मचारियों की आवश्यकता है।
कुल मिलाकर, संसदीय समिति की रिपोर्ट ने देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था के दो प्रमुख संस्थानों में मौजूद मानव संसाधन की गंभीर कमी को सामने रखा है। NCERT में 1,596 और CBSE में 933 रिक्तियां केवल प्रशासनिक आंकड़े नहीं हैं, बल्कि इनका सीधा संबंध शिक्षा नीति, परीक्षा प्रबंधन और लाखों विद्यार्थियों को मिलने वाली सेवाओं की क्षमता से है। अब समिति की सिफारिशों के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और दोनों संस्थान इन रिक्तियों को भरने के लिए कितनी तेजी से कदम उठाते हैं।
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