पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस पर भी भारत पर निशाना, शहबाज शरीफ बोले- ‘पानी की हर बूंद हमारी लाल रेखा’
पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत के खिलाफ एक बार फिर कड़ा बयान दिया है। इस्लामाबाद में ‘यादगार-ए-फतह’ स्मारक के उद्घाटन समारोह में शहबाज शरीफ ने सिंधु जल समझौते और 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव का जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तान की संप्रभुता और सुरक्षा को चुनौती देने पर पहले से भी कड़ा जवाब दिया जाएगा। उन्होंने पानी को पाकिस्तान के लिए ‘लाल रेखा’ बताते हुए भारत को चेतावनी दी। शहबाज ने एक तरफ पाकिस्तान को शांति का समर्थक बताया, लेकिन दूसरी तरफ भारत के खिलाफ सख्त तेवर भी दिखाए। समारोह में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और पाकिस्तान के शीर्ष सैन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। यह बयान ऐसे समय आया है जब पहलगाम आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर और सिंधु जल समझौते को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव अब भी बना हुआ है।
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत के खिलाफ कड़ा बयान दिया है। 14 अगस्त को पाकिस्तान अपना स्वतंत्रता दिवस मना रहा है और इसी अवसर पर इस्लामाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में शहबाज शरीफ ने भारत के साथ 2025 के सैन्य टकराव और सिंधु जल समझौते को लेकर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान शांति चाहता है, लेकिन इसे उसकी कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि पाकिस्तान की संप्रभुता और सुरक्षा को चुनौती मिलने पर जवाब दिया जाएगा।
‘पानी की हर बूंद हमारी लाल रेखा’
इस्लामाबाद में ‘यादगार-ए-फतह’ स्मारक के उद्घाटन के दौरान शहबाज शरीफ ने सिंधु नदी के पानी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लिए पानी की हर बूंद लाल रेखा है और अगर भारत अपने रुख से पीछे नहीं हटता है तो पाकिस्तान इसका सीधा जवाब देगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच सिंधु जल समझौते को लेकर तनाव लगातार बना हुआ है।
शहबाज शरीफ ने भारत पर सिंधु जल समझौते को एकतरफा और गैरकानूनी तरीके से रोकने का आरोप भी लगाया। पाकिस्तान लंबे समय से इस मुद्दे को अपने लिए बेहद संवेदनशील बताता रहा है और उसकी सरकार ने कई मौकों पर कहा है कि सिंधु नदी प्रणाली उसके लिए जीवनरेखा के समान है।
2025 के सैन्य टकराव का भी किया जिक्र
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में मई 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव को भी याद किया। उन्होंने संकेत दिया कि अगर पाकिस्तान की संप्रभुता या सुरक्षा को चुनौती दी गई तो भविष्य में जवाब पहले से ज्यादा कड़ा हो सकता है। उनके बयान में 2025 की घटनाओं की छाप साफ दिखाई दी।
भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए थे और इसके बाद मई में ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान तथा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव बढ़ा और कुछ दिनों तक ड्रोन, मिसाइल और अन्य सैन्य कार्रवाइयों का दौर चला। बाद में संघर्षविराम हुआ। पाकिस्तान इस सैन्य टकराव को अपने नजरिए से ‘मरका-ए-हक’ के रूप में पेश करता रहा है।
‘हम युद्ध नहीं, शांति चाहते हैं’
दिलचस्प बात यह है कि शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में एक तरफ भारत को कड़ी चेतावनी दी, तो दूसरी तरफ पाकिस्तान को शांति का समर्थक देश भी बताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान युद्ध नहीं चाहता और सम्मान तथा गरिमा के साथ शांति चाहता है, लेकिन शांति की इच्छा को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका देश ऐसे विश्व की कल्पना करता है जहां संघर्ष कम हों और विवादों का समाधान न्याय तथा संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के अनुरूप किया जाए। इस तरह उनके भाषण में शांति की अपील और भारत के खिलाफ कड़े रुख, दोनों संदेश एक साथ दिखाई दिए।
‘यादगार-ए-फतह’ स्मारक का हुआ उद्घाटन
शहबाज शरीफ का यह बयान इस्लामाबाद में ‘यादगार-ए-फतह’ यानी विजय स्मारक के उद्घाटन समारोह के दौरान आया। इस कार्यक्रम में पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और देश के शीर्ष सैन्य अधिकारी मौजूद रहे। पाकिस्तान ने इस स्मारक को 2025 के सैन्य संघर्ष के दौरान मारे गए सैनिकों के सम्मान और उनकी कुर्बानी की याद में बनाया है।
पाकिस्तान की ओर से इस पूरे घटनाक्रम को ‘मरका-ए-हक’ के नाम से प्रचारित किया जा रहा है। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित समारोह में इस स्मारक का उद्घाटन पाकिस्तान की ओर से 2025 के संघर्ष की अपनी व्याख्या को राष्ट्रीय स्मृति का हिस्सा बनाने के प्रयास के तौर पर भी देखा जा रहा है।
सिंधु जल समझौता क्यों बना बड़ा मुद्दा?
भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौता 1960 में हुआ था और विश्व बैंक की मध्यस्थता में इस समझौते ने दोनों देशों के बीच नदियों के पानी के बंटवारे का ढांचा तैयार किया था। समझौते के तहत सिंधु, झेलम और चिनाब जैसी पश्चिमी नदियों के पानी के इस्तेमाल में पाकिस्तान को प्रमुख अधिकार मिले, जबकि रावी, ब्यास और सतलुज जैसी पूर्वी नदियां भारत के लिए निर्धारित की गईं।
अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को होल्ड पर रखने का फैसला किया। इसके बाद पानी दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और रणनीतिक तनाव का प्रमुख मुद्दा बन गया। पाकिस्तान लगातार भारत के इस कदम का विरोध करता रहा है।
भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव बरकरार
पहलगाम आतंकी हमले और उसके बाद हुए ऑपरेशन सिंदूर ने भारत-पाकिस्तान संबंधों को बेहद तनावपूर्ण बना दिया था। भारत ने पहलगाम हमले के पीछे पाकिस्तान समर्थित आतंकियों का हाथ होने का आरोप लगाया, जबकि पाकिस्तान ने इन आरोपों से इनकार किया और अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की। इसके बाद दोनों देशों के बीच कई कूटनीतिक और आर्थिक कदम उठाए गए।
मई 2025 के सैन्य संघर्ष के बाद भले ही तत्काल युद्ध जैसी स्थिति समाप्त हो गई, लेकिन दोनों देशों के बीच राजनीतिक और रणनीतिक तनाव अभी भी बना हुआ है। सिंधु जल समझौता इसी तनाव का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।
पाकिस्तान ने खुद को बताया ‘शांति की गारंटी देने वाला देश’
शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में पाकिस्तान को क्षेत्रीय शांति के लिए प्रतिबद्ध देश के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान संघर्ष नहीं चाहता और दुनिया को ऐसे क्षेत्र की जरूरत है जहां विवादों का समाधान बातचीत और न्याय के आधार पर हो।
हालांकि, इसी भाषण में भारत के खिलाफ चेतावनी और पानी को लेकर ‘लाल रेखा’ का उल्लेख दोनों देशों के बीच तनाव की गंभीरता को भी सामने लाता है। ऐसे में पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस पर शहबाज शरीफ का बयान भारत-पाकिस्तान संबंधों में जारी तल्खी को एक बार फिर उजागर करता है।
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