पीएम मोदी ने IMC 2026 का किया उद्घाटन, साइबर फ्रॉड पर ग्लोबल फ्रेमवर्क की जरूरत पर दिया जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 का उद्घाटन किया। उन्होंने 5G के विस्तार, 6G, AI, गेमिंग और सेमीकंडक्टर मिशन पर भारत की प्रगति गिनाई। पीएम मोदी ने साइबर फ्रॉड रोकने के लिए वैश्विक फ्रेमवर्क बनाने और डिजिटल सुरक्षा मजबूत करने पर भी जोर दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 अक्टूबर को नई दिल्ली के यशोभूमि में इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) के 10वें संस्करण का उद्घाटन किया। 7 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक चल रहे इस चार दिवसीय वैश्विक टेक इवेंट में टेलीकॉम, मोबाइल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 5G, 6G, सेमीकंडक्टर, सैटेलाइट कम्युनिकेशन और साइबर सुरक्षा से जुड़े क्षेत्र चर्चा के केंद्र में हैं। कार्यक्रम का आयोजन दूरसंचार विभाग (DoT) और सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) संयुक्त रूप से कर रहे हैं। IMC 2026 की थीम 'Scale Without Boundaries' यानी 'सीमाओं से परे विस्तार' रखी गई है।
इंडिया मोबाइल कांग्रेस के इस संस्करण में भारत के साथ-साथ दुनिया के कई देशों के टेक्नोलॉजी लीडर्स, टेलीकॉम कंपनियां, स्टार्टअप्स, निवेशक, नीति निर्माता और शोधकर्ता हिस्सा ले रहे हैं। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, कार्यक्रम में 100 से अधिक देशों की भागीदारी है। इस साल IMC में 500 से अधिक प्रदर्शक और साझेदार, 600 से ज्यादा स्टार्टअप और करीब 900 विचारक एवं विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं। आयोजन में 2,000 से अधिक टेक्नोलॉजी यूज-केस और 120 से ज्यादा सत्र भी रखे गए हैं।
उद्घाटन के दौरान नाना पाटेकर को किया याद
इंडिया मोबाइल कांग्रेस के उद्घाटन संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर को भी याद किया और उन्हें श्रद्धांजलि दी। नाना पाटेकर के निधन की खबर 8 अक्टूबर को सामने आई। 75 वर्षीय अभिनेता का गोवा में कार्डियक अरेस्ट के बाद निधन हुआ। उनके निधन की खबर से हिंदी और मराठी सिनेमा में शोक की लहर है।
प्रधानमंत्री ने नाना पाटेकर के अभिनय और व्यक्तित्व का उल्लेख करते हुए उन्हें एक गुणी कलाकार बताया। उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर का जाना हिंदी और मराठी सिनेमा के लिए बड़ी क्षति है। लंबे समय तक अपने दमदार अभिनय, प्रभावशाली संवाद अदायगी और अलग-अलग तरह के किरदारों के लिए पहचाने जाने वाले नाना पाटेकर ने भारतीय सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई थी।
5G से 6G की ओर बढ़ रहा भारत
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में हो रही डिजिटल क्रांति और टेलीकॉम क्षेत्र में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए 5G से 6G की ओर बढ़ते देश के सफर पर जोर दिया। भारत में 5G सेवा की शुरुआत 2022 में इंडिया मोबाइल कांग्रेस के मंच से हुई थी। इसके बाद देश में 5G नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है। सरकार के मुताबिक 5G सेवाएं अब देश के 99.9 प्रतिशत जिलों तक पहुंच चुकी हैं और करीब 85 प्रतिशत आबादी को कवर करती हैं।
सरकार के अनुसार देश में 5G बेस ट्रांसीवर स्टेशनों की संख्या पांच लाख से अधिक हो चुकी है। यह विस्तार भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब देश का फोकस अगली पीढ़ी की कनेक्टिविटी यानी 6G पर है। IMC 2026 में 6G रिसर्च, नेटवर्क टेक्नोलॉजी और भविष्य की कनेक्टिविटी से जुड़े कई विषयों पर चर्चा हो रही है।
गांवों तक पहुंच रही डिजिटल कनेक्टिविटी
प्रधानमंत्री ने डिजिटल कनेक्टिविटी को केवल बड़े शहरों तक सीमित न रखने और देश के ग्रामीण हिस्सों तक पहुंचाने पर भी जोर दिया। भारत में मोबाइल और इंटरनेट कनेक्टिविटी के विस्तार ने शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, सरकारी सेवाओं और डिजिटल भुगतान जैसी सुविधाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार का असर सरकारी योजनाओं पर भी दिखाई देता है। किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं में डिजिटल माध्यम से लाभार्थियों तक वित्तीय सहायता पहुंचाने की व्यवस्था ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण को मजबूत किया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के कारण सरकारी सेवाओं और वित्तीय सुविधाओं तक लोगों की पहुंच पहले की तुलना में आसान हुई है।
कोरोना काल में डिजिटल तकनीक बनी सहारा
प्रधानमंत्री ने 2020 के कोरोना महामारी के दौर को भी याद किया। उन्होंने बताया कि जब बड़ी संख्या में लोग अपने परिवार और परिचितों से शारीरिक रूप से दूर थे, उस समय डिजिटल तकनीक ने लोगों को एक-दूसरे से जोड़े रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वीडियो कॉल, ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल भुगतान, टेलीमेडिसिन और ऑनलाइन सरकारी सेवाओं ने उस दौर में लोगों के दैनिक जीवन को चलाने में मदद की। इस अनुभव ने यह भी दिखाया कि मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर केवल आर्थिक विकास के लिए ही नहीं, बल्कि संकट के समय सामाजिक संपर्क और आवश्यक सेवाओं की निरंतरता के लिए भी महत्वपूर्ण है।
गेमिंग और ई-स्पोर्ट्स में बढ़ते अवसर
इंडिया मोबाइल कांग्रेस में प्रधानमंत्री ने भारत के तेजी से बढ़ते गेमिंग सेक्टर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय युवा अब केवल गेम खेलने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ई-स्पोर्ट्स, गेम डेवलपमेंट और कंटेंट क्रिएशन जैसे क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बना रहे हैं।
सस्ते डेटा और बेहतर इंटरनेट कनेक्टिविटी ने गेमिंग और डिजिटल मनोरंजन के विस्तार को गति दी है। भारत में गेमिंग के साथ-साथ लाइव स्ट्रीमिंग, शॉर्ट वीडियो, डिजिटल मीडिया और अन्य कंटेंट आधारित उद्योगों में भी नए अवसर पैदा हुए हैं। इससे युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए रास्ते खुले हैं।
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार ने कंटेंट क्रिएशन को भी एक बड़े आर्थिक क्षेत्र में बदलने में मदद की है। स्मार्टफोन और तेज इंटरनेट की उपलब्धता के कारण देश के छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में क्रिएटर्स सामने आ रहे हैं।
साइबर फ्रॉड रोकने के लिए ग्लोबल फ्रेमवर्क की जरूरत
प्रधानमंत्री मोदी ने तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था के साथ साइबर सुरक्षा की चुनौती पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक के विस्तार के साथ साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन धोखाधड़ी से निपटना भी जरूरी है। लोगों को फोन पर आने वाली संदिग्ध कॉल, मैसेज, लिंक और डिजिटल भुगतान से जुड़े अलर्ट को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।
प्रधानमंत्री ने साइबर फ्रॉड से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर सहयोग और एक प्रभावी फ्रेमवर्क की जरूरत पर जोर दिया। इसका उद्देश्य अलग-अलग देशों, टेलीकॉम ऑपरेटरों, टेक्नोलॉजी कंपनियों और अन्य हितधारकों के बीच सहयोग बढ़ाकर डिजिटल धोखाधड़ी के खिलाफ मजबूत व्यवस्था तैयार करना है।
साइबर अपराध की प्रकृति अब सीमाओं तक सीमित नहीं रही है। एक देश में बैठकर दूसरे देश के लोगों को निशाना बनाने वाले ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी कॉल, फिशिंग, पहचान की चोरी और डिजिटल पेमेंट से जुड़े अपराधों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी होता जा रहा है। ऐसे में टेलीकॉम कंपनियों और टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता बढ़ गई है।
GSMA समेत वैश्विक टेलीकॉम कंपनियों की भूमिका
साइबर सुरक्षा और डिजिटल फ्रॉड के मुद्दे पर वैश्विक स्तर पर सहयोग की जरूरत को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही GSMA बोर्ड के सदस्यों के साथ चर्चा कर चुके हैं। 6 अक्टूबर को हुई इस बातचीत में उन्होंने तकनीक को समावेशी और टिकाऊ विकास का माध्यम बनाने पर जोर दिया था। उन्होंने साइबर फ्रॉड से निपटने के लिए टेक्नोलॉजी आधारित समाधान और यूजर अवेयरनेस की आवश्यकता भी बताई थी।
GSMA मोबाइल इकोसिस्टम से जुड़े ऑपरेटरों और संगठनों का वैश्विक संगठन है। ऐसे में साइबर फ्रॉड के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए टेलीकॉम ऑपरेटरों और तकनीकी कंपनियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
टेलीकॉम सेक्टर में पिछले दशक के सुधारों का जिक्र
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में पिछले एक दशक में टेलीकॉम सेक्टर में किए गए नीतिगत और संरचनात्मक बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए किए गए विभिन्न सुधारों और पहलों को भारत की डिजिटल यात्रा का हिस्सा बताया।
उन्होंने गतिशक्ति संचार पोर्टल और एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू यानी AGR से जुड़े मामलों के निपटारे का भी जिक्र किया। टेलीकॉम क्षेत्र में नीतिगत स्थिरता, इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए पिछले वर्षों में कई बदलाव किए गए हैं।
भारत का टेलीकॉम सेक्टर अब केवल कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं है। 5G, 6G, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, क्वांटम कम्युनिकेशन और सेमीकंडक्टर जैसी तकनीकें अब इसके भविष्य का हिस्सा बन रही हैं। IMC 2026 में इन्हीं क्षेत्रों पर व्यापक चर्चा हो रही है।
सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पर भारत का जोर
प्रधानमंत्री ने भारत के सेमीकंडक्टर मिशन का भी उल्लेख किया। सेमीकंडक्टर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स, स्मार्टफोन, ऑटोमोबाइल, कंप्यूटिंग, टेलीकॉम उपकरण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम की बुनियादी जरूरत हैं। ऐसे में भारत का घरेलू सेमीकंडक्टर निर्माण बढ़ाने पर जोर रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
भारत अब केवल डिजिटल सेवाओं के बाजार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करने के बजाय टेक्नोलॉजी उत्पादों और इलेक्ट्रॉनिक्स के निर्माण की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहता है। IMC 2026 में सेमीकंडक्टर और कोर कंपोनेंट सप्लाई चेन पर भी विशेष चर्चा रखी गई है।
AI और भविष्य की टेक्नोलॉजी पर फोकस
इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को भी प्रमुख स्थान दिया गया है। AI-नेटवर्क, टेलीकॉम स्टैक में AI का इस्तेमाल, एजेंटिक AI और डिजिटल सेवाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग जैसे विषय कार्यक्रम का हिस्सा हैं।
AI और टेलीकॉम के बीच बढ़ता तालमेल भविष्य के नेटवर्क को ज्यादा स्वचालित, कुशल और उपयोगकर्ता-केंद्रित बनाने में मदद कर सकता है। इसी के साथ AI से जुड़े जोखिमों, साइबर सुरक्षा और डिजिटल कंटेंट की विश्वसनीयता जैसे सवाल भी महत्वपूर्ण हो गए हैं। IMC में इन तकनीकी और नीतिगत पहलुओं पर भी चर्चा हो रही है।
सैटेलाइट कम्युनिकेशन और नई कनेक्टिविटी
IMC 2026 में नॉन-टेरेस्ट्रियल नेटवर्क और सैटेलाइट कम्युनिकेशन को भी प्रमुख विषय बनाया गया है। सैटेलाइट आधारित कनेक्टिविटी दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट और संचार सेवाओं के विस्तार में उपयोगी हो सकती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां पारंपरिक टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करना मुश्किल है।
भविष्य में 5G, 6G, सैटेलाइट नेटवर्क और अन्य कनेक्टिविटी तकनीकों का आपसी तालमेल डिजिटल सेवाओं की पहुंच को और व्यापक बनाने में भूमिका निभा सकता है।
IMC को ग्लोबल रिसर्च और इनोवेशन प्लेटफॉर्म बनाने का लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस को केवल एक प्रदर्शनी या टेक्नोलॉजी इवेंट तक सीमित रखने के बजाय इसे रिसर्च, इनोवेशन और मैन्युफैक्चरिंग के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया। इसका उद्देश्य भारत में विकसित तकनीकों और उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के साथ दुनिया भर के टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को भारत के साथ जोड़ना है।
इस साल IMC में 2,000 से अधिक टेक्नोलॉजी यूज-केस और 120 से अधिक सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इसके अलावा 700 से अधिक निवेशक बैठकों की भी योजना है। इससे स्टार्टअप्स, निवेशकों, टेक कंपनियों और नीति निर्माताओं के बीच सहयोग के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
स्मार्ट मोबिलिटी और रोबोटिक्स भी बने IMC का हिस्सा
IMC 2026 में पारंपरिक टेलीकॉम विषयों के अलावा स्मार्ट मोबिलिटी, स्टेडियम एक्सपीरियंस, इंडस्ट्रियल रोबोटिक्स और ट्रांसपोर्ट टेक्नोलॉजी जैसे नए क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है। इससे साफ है कि आधुनिक डिजिटल तकनीक अब केवल मोबाइल और इंटरनेट तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि परिवहन, उद्योग, मनोरंजन और रोजमर्रा की सेवाओं में भी तेजी से इस्तेमाल हो रही है।
भारत की डिजिटल यात्रा में IMC की अहम भूमिका
इंडिया मोबाइल कांग्रेस का 10वां संस्करण ऐसे समय हो रहा है जब भारत 5G के बड़े पैमाने पर विस्तार के बाद अगली पीढ़ी की कनेक्टिविटी, AI, सेमीकंडक्टर और डिजिटल सुरक्षा पर अपना फोकस बढ़ा रहा है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार देश में ब्रॉडबैंड और इंटरनेट यूजर्स की संख्या एक अरब के स्तर को पार कर चुकी है और 5G का विस्तार भी तेजी से हुआ है।
ऐसे में IMC 2026 भारत के लिए अपनी डिजिटल क्षमता को दुनिया के सामने रखने, वैश्विक कंपनियों के साथ साझेदारी बढ़ाने और भविष्य की टेक्नोलॉजी के लिए नीतिगत दिशा पर चर्चा करने का महत्वपूर्ण मंच बन गया है। 7 से 10 अक्टूबर तक चलने वाले इस आयोजन में 100 से अधिक देशों की भागीदारी के साथ भारत का लक्ष्य टेलीकॉम और डिजिटल टेक्नोलॉजी के वैश्विक इकोसिस्टम में अपनी भूमिका को और मजबूत करना है।
प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन में 5G के विस्तार से लेकर 6G की तैयारी, AI और गेमिंग के बढ़ते प्रभाव, सेमीकंडक्टर निर्माण, साइबर फ्रॉड से सुरक्षा और वैश्विक तकनीकी सहयोग तक कई अहम मुद्दे सामने आए। आने वाले वर्षों में डिजिटल टेक्नोलॉजी किस तरह अर्थव्यवस्था, रोजगार, संचार और सार्वजनिक सेवाओं को प्रभावित करेगी, इस दिशा में IMC 2026 को एक महत्वपूर्ण वैश्विक मंच के तौर पर देखा जा रहा है।
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