संसद का मॉनसून सत्र खत्म, राज्यसभा में खरगे का बड़ा आरोप—‘शुद्धिकरण के नाम पर मेरा अपमान किया गया’

संसद के मॉनसून सत्र का 13 अगस्त को हंगामे और सियासी टकराव के बीच समापन हो गया। लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई, जबकि अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी सदन में मौजूद रहे। राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ‘शुद्धिकरण करके मेरा अपमान किया गया’ का आरोप लगाकर राजनीतिक माहौल गरमा दिया। पूरे सत्र में NEET विवाद, छात्रों के प्रदर्शन, कथित पुलिस बल प्रयोग और सरकार-विपक्ष के बीच जवाबदेही को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। हंगामे के बावजूद सरकार ने अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाया और कई विधेयकों को पारित कराया। जानिए संसद के आखिरी दिन सदन में क्या-क्या हुआ और खरगे के बयान पर क्यों गरमाई सियासत।

Aug 13, 2026 - 11:35
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संसद का मॉनसून सत्र खत्म, राज्यसभा में खरगे का बड़ा आरोप—‘शुद्धिकरण के नाम पर मेरा अपमान किया गया’

नई दिल्ली: संसद का मॉनसून सत्र गुरुवार, 13 अगस्त को हंगामे और तीखे राजनीतिक टकराव के बीच समाप्त हो गया। लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। सत्र के आखिरी दिन भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों को लेकर तनाव बना रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी अंतिम दिन सदन में पहुंचे। पूरे सत्र में NEET-UG विवाद, छात्रों के प्रदर्शन और उससे जुड़ी पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दे विपक्ष के प्रमुख निशाने पर रहे।

राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने संबोधन के दौरान कथित तौर पर अपने अपमान का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि ‘शुद्धिकरण’ के नाम पर उनका अपमान किया गया। खरगे के इस बयान के बाद सदन का माहौल राजनीतिक रूप से और गरमा गया। उनका आरोप ऐसे समय में सामने आया जब पूरे मॉनसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार तीखी बयानबाजी और विरोध प्रदर्शन देखने को मिला।

आखिरी दिन भी संसद परिसर में जारी रहा टकराव

मॉनसून सत्र के अंतिम दिन संसद परिसर में भी राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। विपक्षी सांसदों ने अपने मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया, जबकि NDA की ओर से भी विपक्ष के विरोध के खिलाफ प्रदर्शन और राजनीतिक जवाब देखने को मिला। सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह सरकार और विपक्ष के बीच दूरी साफ दिखाई दी।

सत्र के दौरान लगातार हुए व्यवधानों का असर संसदीय कामकाज पर भी पड़ा। लोकसभा में कई बार विपक्षी विरोध और नारेबाजी के कारण कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। सरकार ने विपक्ष पर सदन नहीं चलने देने का आरोप लगाया, जबकि विपक्ष का कहना रहा कि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों पर जवाब देने से बच रही है।

NEET विवाद बना सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा

इस पूरे मॉनसून सत्र में NEET-UG विवाद और छात्रों के प्रदर्शन से जुड़ा मुद्दा सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। विपक्ष ने छात्रों के आंदोलन के दौरान कथित पुलिस बल प्रयोग को लेकर सरकार से जवाब मांगा। विपक्ष की मांग थी कि इस मुद्दे पर संसद में विस्तार से चर्चा हो और गृह मंत्री अमित शाह सरकार का पक्ष स्पष्ट करें।

दूसरी तरफ सरकार ने भी विपक्ष को चर्चा के लिए तैयार रहने को कहा। सरकार की ओर से अमित शाह के सदन में इस मुद्दे पर बयान देने और सवालों का जवाब देने की पेशकश की गई थी। हालांकि, यह कोशिश संसद में जारी गतिरोध को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकी और सत्र के अंतिम चरण तक राजनीतिक टकराव जारी रहा।

खरगे के ‘शुद्धिकरण’ वाले बयान से गरमाया माहौल

राज्यसभा में खरगे के बयान ने अंतिम दिन की राजनीतिक बहस को एक नया मुद्दा दे दिया। खरगे ने आरोप लगाया कि उनके साथ ‘शुद्धिकरण’ के नाम पर अपमानजनक व्यवहार किया गया। उन्होंने इसे अपने सम्मान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ते हुए आपत्ति जताई।

खरगे लगातार यह कहते रहे हैं कि विपक्षी नेताओं और सांसदों के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए और संसद में सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। उनके बयान ने सरकार और विपक्ष के बीच पहले से चले आ रहे विवाद को और राजनीतिक धार दे दी।

प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह भी सदन पहुंचे

मॉनसून सत्र के आखिरी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी संसद पहुंचे। इससे पहले सत्र के दौरान विपक्ष लगातार दोनों नेताओं की सदन में मौजूदगी और सरकार की ओर से जवाब देने को लेकर सवाल उठाता रहा था।

सरकार का पक्ष रहा कि विपक्ष को चर्चा के अवसर का इस्तेमाल करना चाहिए और सदन को सुचारू रूप से चलने देना चाहिए। वहीं विपक्ष की ओर से लगातार मांग की गई कि जिन मुद्दों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, उन पर शीर्ष स्तर पर जवाब दिया जाए।

सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध नहीं टूटा

मॉनसून सत्र की सबसे बड़ी तस्वीर सरकार और विपक्ष के बीच बना राजनीतिक गतिरोध रहा। दोनों पक्षों के बीच कई बार बातचीत और गतिरोध खत्म करने की कोशिशें हुईं, लेकिन NEET, छात्र प्रदर्शन और अन्य मुद्दों पर मतभेद बने रहे।

सरकार ने जहां विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया, वहीं विपक्ष ने सरकार पर अपनी जिम्मेदारी से बचने का आरोप लगाया। इस राजनीतिक खींचतान के कारण सत्र के कई हिस्सों में विधायी कामकाज के साथ-साथ हंगामा भी प्रमुखता से दिखाई दिया।

सरकार ने 11 विधेयक पारित किए

लगातार हंगामे के बावजूद सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने में सफल रही। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, मॉनसून सत्र के दौरान सरकार ने कुल 11 विधेयक पारित कराए। यानी राजनीतिक गतिरोध के बावजूद सरकार ने कई विधायी प्रस्तावों को संसद की प्रक्रिया से आगे बढ़ाया।

हालांकि विपक्ष ने कई विधेयकों और सरकार की कार्यशैली को लेकर सवाल उठाए। विपक्ष का तर्क रहा कि महत्वपूर्ण विधेयकों पर पर्याप्त चर्चा और संसदीय जांच जरूरी है, जबकि सरकार ने अपने विधायी काम को संसद की संवैधानिक जिम्मेदारी के तहत आगे बढ़ाया।

NEET पर सरकार की चर्चा की कोशिश भी नहीं बनी समाधान

सत्र के अंतिम दिनों में सरकार ने NEET और छात्र प्रदर्शन के मुद्दे पर चर्चा की पेशकश की। गृह मंत्री अमित शाह की ओर से इस मुद्दे पर जवाब देने की तैयारी की खबर भी सामने आई। लेकिन विपक्ष अपनी अन्य मांगों पर भी कायम रहा और इससे गतिरोध पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ।

इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ हुआ कि सरकार और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी राजनीतिक स्थिति से पीछे हटने को तैयार नहीं थे। एक तरफ सरकार चर्चा और सदन चलाने पर जोर देती रही, वहीं विपक्ष ने पहले अपनी मांगों पर जवाब और जवाबदेही की मांग की।

सत्र खत्म, लेकिन मुद्दे बाकी

लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के साथ मॉनसून सत्र का औपचारिक समापन हो गया। लेकिन सत्र के दौरान उठे कई मुद्दे राजनीतिक रूप से अभी खत्म नहीं हुए हैं। NEET-UG विवाद, छात्रों के प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई और संसद में सरकार-विपक्ष के बीच जवाबदेही को लेकर जारी बहस आने वाले दिनों में भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बनी रह सकती है।

सत्र का समापन भले ही हो गया हो, लेकिन आखिरी दिन खरगे के ‘शुद्धिकरण’ और अपमान के आरोप ने राजनीतिक विवाद को एक और मुद्दा दे दिया। दूसरी ओर, सरकार यह रेखांकित कर सकती है कि व्यवधानों के बावजूद उसका विधायी एजेंडा आगे बढ़ा और 11 विधेयक पारित किए गए।

कुल मिलाकर, मॉनसून सत्र 2026 सरकार और विपक्ष के बीच तीखे टकराव, लगातार विरोध-प्रदर्शन और NEET विवाद के कारण सुर्खियों में रहा। अंतिम दिन प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह की मौजूदगी तथा राज्यसभा में खरगे के बयान ने सत्र के समापन को भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया। अब संसद का यह सत्र समाप्त हो चुका है, लेकिन इसके दौरान उठे सवाल और आरोप आने वाले समय में देश की राजनीति में चर्चा का विषय बने रह सकते हैं।

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