BRICS सम्मेलन के बहाने भारत-चीन रिश्तों में नई शुरुआत? अगले महीने भारत आ सकते हैं शी जिनपिंग
नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा को कोविड और गलवान विवाद के बाद भारत-चीन संबंधों में सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
मध्य-पूर्व में जारी तनाव और बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत और चीन के संबंधों को लेकर एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। जानकारी के अनुसार, अगले महीने नई दिल्ली में आयोजित होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत आने की संभावना जताई जा रही है। यदि यह यात्रा होती है, तो यह कोविड-19 महामारी और 2020 के गलवान सीमा संघर्ष के बाद शी जिनपिंग की पहली भारत यात्रा होगी।
इस संभावित दौरे को केवल एक औपचारिक शिखर सम्मेलन के रूप में नहीं, बल्कि भारत और चीन के बीच संबंधों में संभावित सुधार के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों में सीमा विवाद और सैन्य तनाव के कारण काफी खटास आई थी। ऐसे में यदि दोनों देशों के शीर्ष नेता आमने-सामने बातचीत करते हैं, तो यह द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकता है।
BRICS (ब्रिक्स) दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका सहित नए सदस्य देश भी शामिल हैं। इस मंच पर वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, निवेश, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, तकनीकी सहयोग और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार जैसे विषयों पर चर्चा होती है। भारत इस बार सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, इसलिए सभी सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
यदि शी जिनपिंग भारत आते हैं, तो उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी हो सकती है। ऐसी बैठक में दोनों देशों के बीच सीमा विवाद, व्यापार, निवेश, क्षेत्रीय सुरक्षा, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, आर्थिक सहयोग और बहुपक्षीय मंचों पर साझेदारी जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना मानी जा रही है।
भारत और चीन के संबंधों में वर्ष 2020 का गलवान घाटी संघर्ष एक बड़ा मोड़ साबित हुआ था। इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य और राजनीतिक स्तर पर कई दौर की वार्ताएं हुईं। पिछले कुछ समय में सीमा पर तनाव कम करने और सैनिकों की चरणबद्ध वापसी को लेकर भी कई समझौते हुए हैं। हालांकि, सीमा विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और दोनों पक्ष लगातार संवाद बनाए हुए हैं।
कोविड-19 महामारी के बाद भी दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच प्रत्यक्ष मुलाकातें सीमित रही हैं। ऐसे में शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा को द्विपक्षीय संवाद को नई गति देने वाला कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि उच्चस्तरीय कूटनीतिक बातचीत से विश्वास बहाली की दिशा में सकारात्मक संदेश जा सकता है।
यह संभावित दौरा ऐसे समय में सामने आया है जब मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष और वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण कई देश अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं। भारत और चीन दोनों वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उनकी भागीदारी विश्व राजनीति को प्रभावित करती है।
आर्थिक दृष्टि से भी भारत और चीन के संबंध महत्वपूर्ण हैं। सीमा तनाव के बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापार लगातार जारी रहा है। आने वाले समय में यदि राजनीतिक और कूटनीतिक संबंधों में सुधार होता है, तो व्यापार, निवेश, विनिर्माण, तकनीक और आपूर्ति श्रृंखला के क्षेत्रों में सहयोग की नई संभावनाएं भी खुल सकती हैं।
विदेश नीति के जानकारों का मानना है कि BRICS जैसे बहुपक्षीय मंच सदस्य देशों को आपसी मतभेदों के बावजूद संवाद बनाए रखने का अवसर प्रदान करते हैं। ऐसे सम्मेलन केवल वैश्विक मुद्दों पर चर्चा का मंच नहीं होते, बल्कि इनके दौरान होने वाली द्विपक्षीय बैठकों से भी कई महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल आगे बढ़ती हैं।
हालांकि, शी जिनपिंग की भारत यात्रा को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यदि यह दौरा तय होता है, तो दोनों देशों के विदेश मंत्रालय और संबंधित एजेंसियां इसके कार्यक्रम और एजेंडे की औपचारिक घोषणा करेंगी। फिलहाल इस संभावित यात्रा को लेकर कूटनीतिक और राजनीतिक हलकों में व्यापक चर्चा जारी है।
यदि शी जिनपिंग वास्तव में नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होते हैं, तो यह केवल सम्मेलन की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि भारत-चीन संबंधों के भविष्य के लिहाज से भी एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जाएगा। दोनों देशों के बीच संवाद, सहयोग और विश्वास बहाली की दिशा में यह यात्रा नई संभावनाओं का रास्ता खोल सकती है।
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