SIR विवाद पर चिराग की EC को सलाह, बोले- ‘अपनी बात मजबूती से रखें’, विपक्ष ला सकता है CEC के खिलाफ प्रस्ताव

SIR विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने चुनाव आयोग से अपनी बात मजबूती से जनता के सामने रखने की सलाह दी। वहीं कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन का ऐलान किया है। कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसद में प्रस्ताव लाने की तैयारी में भी जुटी है। आखिर SIR को लेकर विवाद क्यों बढ़ रहा है और चिराग पासवान ने EC को क्या सलाह दी? जानिए इस रिपोर्ट में।

Sep 25, 2026 - 12:46
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SIR विवाद पर चिराग की EC को सलाह, बोले- ‘अपनी बात मजबूती से रखें’, विपक्ष ला सकता है CEC के खिलाफ प्रस्ताव

SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। इसी बीच केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान ने चुनाव आयोग को सलाह दी है कि वह अपने पक्ष और अपनी दलीलों को मजबूती से जनता के सामने रखे, ताकि चुनावी प्रक्रिया को लेकर लोगों के मन में किसी तरह का संदेह न रहे।

चिराग पासवान ने चुनाव आयोग को क्या सलाह दी?

SIR को लेकर विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के बीच चिराग पासवान का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि अगर चुनाव आयोग को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं, तो आयोग की भी जिम्मेदारी है कि वह अपना पक्ष मजबूती से रखे। चिराग के मुताबिक, चुनाव आयोग को जनता का विश्वास बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर चुनावी प्रक्रिया को लेकर ही लोगों के मन में संदेह पैदा होने लगे, तो यह उचित स्थिति नहीं होगी। इसलिए आयोग को सामने आकर अपनी बात स्पष्ट और मजबूती से रखनी चाहिए, ताकि जनता के मन में किसी तरह का भ्रम या संदेह न रहे।

SIR को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?

SIR मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है, जिसके तहत मतदाता सूची में दर्ज नामों और मतदाताओं की पात्रता की दोबारा जांच की जाती है। इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से कई सवाल पूछे हैं। विवाद उस समय और बढ़ गया जब एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयोग के भीतर SIR से जुड़े कुछ फैसलों और आदेशों को लेकर दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आपत्तियां दर्ज की थीं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर विभिन्न फैसलों और आदेशों को लेकर आपत्तियां दर्ज की थीं।

हालांकि, चुनाव आयोग ने इस रिपोर्ट के बाद कहा कि किसी भी संस्थान में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और सुझाव सामने आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग ने यह भी कहा कि उसके सभी आदेश कानूनी आधार और निर्धारित वैधानिक प्रक्रियाओं के तहत जारी किए जाते हैं। आयोग के अनुसार, केवल तीन चुनाव आयुक्त ही नहीं बल्कि आयोग का प्रत्येक अधिकारी चुनाव प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए सुझाव देने के लिए अधिकृत है।

25 सितंबर को कांग्रेस का देशव्यापी प्रदर्शन

SIR विवाद को लेकर कांग्रेस ने देशभर में प्रदर्शन का कार्यक्रम बनाया है। कांग्रेस की ओर से 25 सितंबर को दिल्ली समेत विभिन्न राज्यों में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन की घोषणा की गई है। दिल्ली में चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन प्रस्तावित है, जबकि राज्यों में पार्टी की इकाइयां चुनाव आयोग के कार्यालयों के सामने विरोध प्रदर्शन करेंगी। कांग्रेस ने अपने राज्य संगठनों को आगे भी जिला स्तर पर प्रदर्शन तेज करने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, पार्टी ने 28 सितंबर से जिला कमेटियों को कलेक्ट्रेट तक मार्च निकालने को कहा है।

दिल्ली के अलावा अलग-अलग राज्यों में भी कांग्रेस कार्यकर्ता SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विरोध दर्ज करा रहे हैं। दिल्ली में चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी की गई है।

बिहार में RJD भी करेगी प्रदर्शन

बिहार में भी SIR को लेकर राजनीतिक विरोध जारी है। राष्ट्रीय जनता दल यानी RJD ने जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करने की बात कही है। इससे पहले बिहार कांग्रेस भी SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर प्रदर्शन कर चुकी है। पटना में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी।

दिल्ली में जंतर-मंतर पर भी विरोध प्रदर्शन का कार्यक्रम सामने आया है। AISA की ओर से भी SIR के मुद्दे पर प्रदर्शन की तैयारी की गई है। इस तरह SIR अब केवल चुनावी प्रक्रिया से जुड़ा प्रशासनिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच राजनीतिक टकराव का बड़ा विषय बन चुका है।

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव की तैयारी

इसी बीच कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसद के दोनों सदनों में प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरू कर दी है। कांग्रेस सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, पार्टी ने इस मुद्दे पर अन्य विपक्षी दलों से संपर्क किया है और संयुक्त विपक्ष की ओर से प्रस्ताव लाने की तैयारी की जा रही है। प्रस्ताव का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है और इसे कानूनी विशेषज्ञों की सलाह से अंतिम रूप दिए जाने की बात कही गई है।

कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, यह नोटिस अगले दो सप्ताह के भीतर लोकसभा और राज्यसभा में दिया जा सकता है। कुछ रिपोर्टों में इसे अगले सप्ताह तक पेश किए जाने की संभावना भी बताई गई है। हालांकि, अंतिम तारीख और प्रस्ताव का स्वरूप विपक्षी दलों के बीच समन्वय और ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिए जाने के बाद स्पष्ट होगा।

विपक्षी दलों से संपर्क कर रही कांग्रेस

कांग्रेस इस मुद्दे पर विपक्षी दलों को साथ लाने की कोशिश कर रही है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि प्रस्ताव को दोनों सदनों में लाने के लिए विपक्षी दलों से चर्चा की जा रही है। प्रस्ताव में SIR से जुड़े हालिया विवाद और चुनाव आयोग के भीतर कथित असहमति से जुड़े मुद्दों को आधार बनाए जाने की संभावना है।

यह पहली बार नहीं है जब विपक्ष की ओर से ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसदीय प्रक्रिया शुरू करने की बात सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, विपक्ष पहले भी इस संबंध में नोटिस दे चुका है। हिंदुस्तान टाइम्स ने रिपोर्ट किया है कि इस साल मार्च और अप्रैल में भी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हटाने संबंधी नोटिस दिए गए थे।

महाभियोग और हटाने की प्रक्रिया को लेकर क्या है नियम?

मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया सामान्य सरकारी पदों से अलग है। संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग की संवैधानिक स्थिति निर्धारित है और मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए संसद की विशेष प्रक्रिया अपनानी होती है। इसलिए विपक्ष की ओर से प्रस्ताव का नोटिस देना अपने आप में पद से हटाए जाने के बराबर नहीं है। आगे की प्रक्रिया संसद के नियमों और संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार होगी।

EC ने भी रखा अपना पक्ष

SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग ने अपनी ओर से स्पष्ट किया है कि आयोग के भीतर अलग-अलग राय या सुझाव सामने आना संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा है। आयोग ने कहा है कि उसके आदेश वैधानिक प्रक्रियाओं के तहत लिए जाते हैं। दूसरी ओर, विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया और चुनाव आयोग के फैसलों में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इन दावों और आयोग के स्पष्टीकरण के बीच विवाद अभी जारी है।

चिराग के बयान से क्या संकेत?

इस पूरे राजनीतिक विवाद के बीच चिराग पासवान का बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने विपक्ष के आरोपों का समर्थन या विरोध करने के बजाय चुनाव आयोग की संचार और पारदर्शिता की जिम्मेदारी पर जोर दिया है। उनका कहना है कि चुनाव आयोग को जनता के सामने अपना पक्ष मजबूती से रखना चाहिए, ताकि चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा बना रहे। ऐसे समय में जब विपक्ष SIR को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है और आयोग अपनी प्रक्रिया को कानूनी व संस्थागत नियमों के अनुरूप बता रहा है, चिराग का बयान चुनाव आयोग से सार्वजनिक तौर पर अपनी स्थिति और अधिक स्पष्ट करने की अपेक्षा रखता है।

फिलहाल SIR को लेकर राजनीतिक टकराव आगे बढ़ता दिख रहा है। एक तरफ कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल देशभर में प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसद में प्रस्ताव लाने की कवायद शुरू हो गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में SIR, मतदाता सूची की पारदर्शिता और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर संसद से लेकर सड़क तक बहस और तेज होने की संभावना है।

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