UNGA में शहबाज को भारत का करारा जवाब, पेटल गहलोत ने आतंकवाद से PoK तक पाकिस्तान के दावों पर उठाए सवाल

UNGA में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के कश्मीर और अन्य मुद्दों पर दिए भाषण के बाद भारत के राइट ऑफ रिप्लाई पर आधारित है। पेटल गहलोत ने आतंकवाद, ओसामा बिन लादेन, लोकतंत्र, धार्मिक असहिष्णुता, PoJK और सीमा पार आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान के दावों पर जवाब दिया। साथ ही ऑपरेशन सिंदूर और 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष का भी संदर्भ सामने आया।

Sep 26, 2026 - 11:20
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UNGA में शहबाज को भारत का करारा जवाब, पेटल गहलोत ने आतंकवाद से PoK तक पाकिस्तान के दावों पर उठाए सवाल

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाषण के बाद भारत ने राइट ऑफ रिप्लाई के तहत कड़ा जवाब दिया। संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी मिशन की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के आतंकवाद, लोकतंत्र, धार्मिक सहिष्णुता, मानवाधिकार और जम्मू-कश्मीर से जुड़े दावों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पाकिस्तान के प्रतिनिधि की टिप्पणियों को निशाना बनाते हुए कहा कि महासभा ने पाकिस्तान की ओर से कुछ “अजीब टिप्पणियां” सुनीं।

पेटल गहलोत ने अपने जवाब में 9/11 आतंकी हमले की 25वीं बरसी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया ने करीब दो सप्ताह पहले 9/11 हमलों की 25वीं बरसी मनाई है और इस संदर्भ में पाकिस्तान के दावों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। गहलोत ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि 9/11 हमले का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान की प्रमुख सैन्य अकादमी के पास लंबे समय तक रह रहा था।

ओसामा बिन लादेन और पाकिस्तान की सैन्य संस्था का जिक्र

भारत की ओर से जवाब देते हुए पेटल गहलोत ने कहा कि ओसामा बिन लादेन का पाकिस्तान में रहना आतंकवाद के मुद्दे पर देश की भूमिका से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लादेन पाकिस्तान की प्रमुख सैन्य अकादमी के ठीक पास रह रहा था। गहलोत ने पाकिस्तान के उस राजनीतिक ढांचे पर भी सवाल उठाया, जिसकी वैधता को लेकर देश के भीतर ही “फॉर्म 47 सरकार” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है।

भारत ने इस संदर्भ में पाकिस्तान के लोकतंत्र संबंधी दावों को भी चुनौती दी। गहलोत ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों पर टिप्पणी करना उस समय विडंबनापूर्ण है, जब उसके अपने राजनीतिक और संवैधानिक ढांचे को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

लोकतांत्रिक अधिकारों पर भी पाकिस्तान को घेरा

पेटल गहलोत ने पाकिस्तान में लोकतांत्रिक अधिकारों की स्थिति का मुद्दा उठाते हुए कहा कि भारत ने ऐसे शासन से लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवीय मूल्यों पर “पाखंडी उपदेश” सुने हैं। उन्होंने पाकिस्तान की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि वहां की राजधानी अपने ही लोगों से सुरक्षा के लिए मजबूत की जा रही है।

गहलोत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था में वास्तविक सत्ता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। उनके शब्दों में, यह “सेना का, सेना द्वारा और सेना के लिए चलने वाला शासन” है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेतृत्व बदलता रह सकता है, लेकिन वास्तविक फैसले कौन लेता है, इस पर भ्रम नहीं होना चाहिए।

भारत की फर्स्ट सेक्रेटरी ने पाकिस्तान के 27वें संविधान संशोधन और देश के “वास्तविक शासक” को कथित तौर पर दी गई आजीवन छूट का भी उल्लेख किया। इस संदर्भ में भारत ने पाकिस्तान की लोकतंत्र और संवैधानिक व्यवस्था पर की गई टिप्पणियों को उसके अपने राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर देखा।

धार्मिक सहिष्णुता के मुद्दे पर भी पलटवार

पाकिस्तान की ओर से धार्मिक मुद्दों पर की गई टिप्पणियों का जवाब देते हुए भारत ने पाकिस्तान में धार्मिक असहिष्णुता और अल्पसंख्यकों की स्थिति का मुद्दा उठाया। पेटल गहलोत ने कहा कि धार्मिक सहिष्णुता पर ऐसे शासन की ओर से बात की जा रही है, जिसकी व्यवस्था में ईशनिंदा कानूनों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

उन्होंने पाकिस्तान पर कट्टरता और नफरत का लंबा रिकॉर्ड होने का आरोप लगाया। गहलोत ने कहा कि पाकिस्तान सुरक्षा की बात करता है, लेकिन भारत के अनुसार उसके यहां से सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा मिलने के आरोप लंबे समय से सामने आते रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ होने वाले व्यवहार से परिचित है और धार्मिकता का दिखावा करके अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह नहीं किया जा सकता।

कश्मीर पर भारत ने PoK का मुद्दा उठाया

शहबाज शरीफ ने अपने UNGA भाषण में एक बार फिर जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया। इसके जवाब में भारत ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और आगे भी रहेगा। पेटल गहलोत ने कहा कि यदि पाकिस्तान कश्मीर की स्थिति पर चर्चा करना चाहता है तो उसे पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) की स्थिति पर भी ध्यान देना चाहिए।

भारत ने PoJK में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों और स्थानीय लोगों की समस्याओं का मुद्दा उठाया। गहलोत ने रावलकोट के लोगों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां के लोगों से पूछा जाना चाहिए कि वे लंबे समय से कथित मनमानी हत्याओं, हिंसा और बुनियादी अधिकारों से वंचित किए जाने का सामना कैसे कर रहे हैं।

इस तरह भारत ने पाकिस्तान द्वारा जम्मू-कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने के जवाब में उसके कब्जे वाले हिस्से की स्थिति को भी चर्चा के केंद्र में लाने की कोशिश की। भारत का आधिकारिक रुख लगातार रहा है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और इस मुद्दे पर पाकिस्तान के दावों को भारत स्वीकार नहीं करता।

सीमा पार आतंकवाद पर भारत का सख्त संदेश

भारत के जवाब का सबसे प्रमुख हिस्सा सीमा पार आतंकवाद को लेकर था। पेटल गहलोत ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद की नीति अपनाई जाती रही है। उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले साल यह दिखा दिया था कि आतंकवादियों के लिए भागने या छिपने की जगह नहीं होगी।

गहलोत ने कहा कि भारत अपने बचाव और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने के अधिकार का इस्तेमाल करता रहेगा। उन्होंने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि पाकिस्तान की ओर से होने वाले आतंकवाद के परिणाम होंगे। भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा से पाकिस्तान के दावों और उसकी नीतियों का मूल्यांकन उनके वास्तविक रिकॉर्ड के आधार पर करने की अपील की।

शहबाज शरीफ ने UNGA में फिर उठाया कश्मीर का मुद्दा

इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में करीब 23 मिनट का भाषण दिया था। अपने संबोधन में उन्होंने 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य संघर्ष का उल्लेख किया। शरीफ ने इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को संघर्ष के दौरान “समय पर हस्तक्षेप” के लिए धन्यवाद भी दिया।

शरीफ ने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाते हुए कहा कि दक्षिण एशिया को 2025 जैसे संघर्ष की स्थिति में दोबारा पहुंचने से रोकने के लिए कश्मीर मुद्दे का “न्यायपूर्ण और निष्पक्ष समाधान” जरूरी है। उन्होंने भारत के साथ विवादों, खासकर कश्मीर को लेकर पाकिस्तान की पुरानी स्थिति को दोहराया।

पाकिस्तान की ओर से कश्मीर के साथ-साथ सिंधु जल संधि से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया गया। हालांकि भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है तथा भारत-पाकिस्तान के बीच किसी भी मुद्दे पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की जाएगी।

भारत-पाकिस्तान संघर्ष और ऑपरेशन सिंदूर का संदर्भ

भारत और पाकिस्तान के बीच 2025 में तनाव काफी बढ़ गया था। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 नागरिकों की मौत हुई थी। भारत ने इस हमले के जवाब में 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में मौजूद आतंकी ढांचे को निशाना बनाने की बात कही थी। भारत ने इस कार्रवाई को पहलगाम आतंकी हमले के जवाब के रूप में प्रस्तुत किया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव बढ़ा और कई दिनों तक स्थिति बेहद संवेदनशील बनी रही।

कश्मीर और आतंकवाद को लेकर भारत का रुख इसके बाद भी लगातार स्पष्ट रहा है। भारत पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने का आरोप लगाता रहा है और कहता रहा है कि आतंकवाद के खिलाफ अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करना उसका अधिकार है।

UNGA में आमने-सामने आए भारत और पाकिस्तान के दावे

संयुक्त राष्ट्र महासभा में शहबाज शरीफ के भाषण और भारत के राइट ऑफ रिप्लाई ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान के बीच कश्मीर और आतंकवाद को लेकर जारी मतभेदों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सामने ला दिया। पाकिस्तान ने कश्मीर को विवादित मुद्दे के रूप में पेश करते हुए इसके समाधान की मांग की, जबकि भारत ने जम्मू-कश्मीर पर अपने संप्रभुता संबंधी रुख को दोहराते हुए पाकिस्तान के कब्जे वाले हिस्से में मानवाधिकार और स्थानीय अधिकारों का मुद्दा उठाया।

भारत ने पाकिस्तान के आतंकवाद और धार्मिक असहिष्णुता से जुड़े रिकॉर्ड का भी उल्लेख किया। वहीं, पाकिस्तान लंबे समय से भारत पर जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाता रहा है। दोनों देशों के इन परस्पर विरोधी दावों के बीच संयुक्त राष्ट्र का मंच एक बार फिर दोनों पक्षों की कूटनीतिक बयानबाजी का केंद्र बना।

भारत की ओर से पेटल गहलोत का जवाब मुख्य रूप से आतंकवाद, पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था, धार्मिक असहिष्णुता, अल्पसंख्यकों की स्थिति, PoJK और सीमा पार आतंकवाद के मुद्दों पर केंद्रित रहा। भारत ने स्पष्ट किया कि कश्मीर को लेकर पाकिस्तान की ओर से उठाए जाने वाले दावों को वह स्वीकार नहीं करता और आतंकवाद के खिलाफ अपनी सुरक्षा नीति जारी रखने की बात दोहराता है।

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