ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन का ऐलान
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक अभिजीत दीपके ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार 26 सितंबर तक इस्तीफा नहीं देते हैं, तो CJP 2 अक्टूबर से मुंबई में देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करेगी। SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग को लेकर उठ रहे सवालों के बीच जानिए CJP की मांगें, आंदोलन की तैयारी और पूरे विवाद की वजह।
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। CJP के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दीपके ने कहा है कि अगर ज्ञानेश कुमार 26 सितंबर तक अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं, तो पार्टी 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती के दिन मुंबई से अपना देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी। इसके बाद विरोध प्रदर्शन को देश के दूसरे शहरों तक ले जाने की बात कही गई है।
अभिजीत दीपके ने शुक्रवार, 25 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार अगले दिन तक इस्तीफा नहीं देते हैं तो CJP 2 अक्टूबर को मुंबई से राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन को भारत के अलग-अलग शहरों तक ले जाया जाएगा। दीपके ने गांधी जयंती के मौके पर लोगों से लोकतंत्र बचाने का संकल्प लेने की अपील भी की।
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची में बदलाव और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस तेज है। CJP का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता अधिकारों से जुड़े कई सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए। हालांकि, दीपके की ओर से लगाए गए आरोप और उनकी मांगें राजनीतिक दावे हैं, जिन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
48 घंटे का अल्टीमेटम और तीन प्रमुख मांगें
इससे पहले 24 सितंबर को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अभिजीत दीपके ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर CEC इस्तीफा नहीं देते हैं तो CJP देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी और दिल्ली में भी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने इसे ‘Jantar Mantar 2.0’ के रूप में आगे बढ़ाने की बात कही थी।
CJP ने अपनी मांगों में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के साथ-साथ उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग भी रखी है। संगठन ने यह सवाल उठाया है कि कथित तौर पर मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े फैसलों के पीछे किसका निर्देश था। इसके अलावा CJP ने चुनावी प्रक्रिया से संबंधित मौजूदा कदमों को रोकने और SIR को तत्काल स्थगित करने की मांग की है।
संगठन ने यह भी मांग रखी है कि मतदाता सूची को जनवरी 2025 की स्थिति में वापस लाया जाए और SIR से जुड़े फैसलों तथा कार्रवाई की जांच के लिए स्वतंत्र जांच आयोग बनाया जाए। इसके अलावा CJP ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को बदलने और ऐसी नई नियुक्ति प्रक्रिया बनाने की मांग की है, जिसमें सिविल सोसाइटी की भागीदारी हो।
‘Election Commission Thik Karo’ अभियान भी शुरू
CJP ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन के साथ ‘Election Commission Thik Karo’ नाम से एक अभियान भी शुरू करने की घोषणा की है। संगठन का कहना है कि उसका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को उठाना और मतदाताओं के अधिकारों की बात करना है। इससे पहले CJP की ओर से ‘School Thik Karo’ अभियान भी चलाए जाने की जानकारी सामने आई थी।
दीपके ने विपक्षी दलों से भी चुनाव प्रक्रिया को लेकर अपनी भूमिका पर पुनर्विचार करने की अपील की है। उनका कहना है कि अगर किसी राजनीतिक दल को लगता है कि चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी हो रही है, तो उसे चुनाव में हिस्सा लेने के बजाय इस मुद्दे पर अपना रुख तय करना चाहिए। यह CJP का राजनीतिक रुख है और विपक्षी दलों की ओर से इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं।
SIR को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?
CJP का आंदोलन ऐसे समय में सामने आया है जब मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए जा रहे हैं। हाल ही में एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने की अवधि में कम से कम 14 मौकों पर मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने या बहाल करने और चुनावी रोल से जुड़े फैसलों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं।
रिपोर्ट में फॉर्म 6 में बदलाव, मतदाता सूची से जुड़े नियंत्रण के केंद्रीकरण, पश्चिम बंगाल में मतदाता नाम हटाने से जुड़ी अपीलों और गोवा में पात्र मतदाताओं के नाम शामिल किए जाने जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों से निकाले जा रहे निष्कर्षों पर आपत्ति जताई है और कहा है कि SIR समेत आयोग के फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी प्राप्त थी।
यही वजह है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची में बदलाव और SIR को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। CJP ने इसी विवाद के बीच अपने आंदोलन को आगे बढ़ाने की घोषणा की है और 2 अक्टूबर को मुंबई से इसकी शुरुआत करने की तारीख तय की है, बशर्ते ज्ञानेश कुमार 26 सितंबर तक इस्तीफा नहीं देते।
अब 2 अक्टूबर पर नजर
CJP के ऐलान के बाद अब 2 अक्टूबर की तारीख महत्वपूर्ण हो गई है। संगठन के मुताबिक आंदोलन की शुरुआत मुंबई से होगी और इसके बाद इसे देश के अन्य शहरों तक ले जाया जाएगा। दीपके ने इसे गांधी जयंती से जोड़ते हुए लोकतंत्र को लेकर संकल्प लेने की अपील की है।
फिलहाल CJP की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि उसका आंदोलन ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित रहेगा। वहीं, चुनाव आयोग की ओर से SIR और चुनावी रोल से संबंधित प्रक्रियाओं को लेकर अलग पक्ष रखा गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में CJP के आंदोलन, चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और SIR को लेकर जारी कानूनी एवं राजनीतिक बहस पर नजर रहेगी।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)