विभाजन की दर्दनाक यादों को PM मोदी ने किया याद, बोले- उजड़े परिवारों ने शून्य से फिर खड़ी की जिंदगी

14 अगस्त को देश ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में 1947 के विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों और विस्थापन का दर्द झेलने वाले परिवारों को याद कर रहा है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभाजन पीड़ितों के साहस, संघर्ष और जज्बे को नमन किया। पीएम मोदी ने कहा कि विभाजन ने कई परिवारों को उजाड़ दिया, लोगों ने अपनों को खोया और भारी पीड़ा सही, लेकिन प्रभावित लोगों ने विपरीत परिस्थितियों से उबरकर शून्य से अपनी जिंदगी दोबारा खड़ी की और देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया। प्रधानमंत्री ने इस दिन को आपसी सद्भाव, भाईचारे और राष्ट्रीय एकजुटता के संकल्प को मजबूत करने वाला बताया। उन्होंने देशवासियों से एकजुट होकर ‘विकसित भारत’ के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने की अपील भी की। पीएम मोदी ने एक अन्य पोस्ट में विभाजन से प्रभावित लोगों के साहस और सामर्थ्य को नमन करते हुए संस्कृत श्लोक के जरिए निरंतर प्रयास और दृढ़ संकल्प का संदेश दिया।

Aug 14, 2026 - 10:31
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विभाजन की दर्दनाक यादों को PM मोदी ने किया याद, बोले- उजड़े परिवारों ने शून्य से फिर खड़ी की जिंदगी

नई दिल्ली: देश आज 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ मना रहा है। यह दिन 1947 में भारत के विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों, विस्थापित परिवारों और उस दौर की अकल्पनीय मानवीय पीड़ा को याद करने के लिए समर्पित है। इसी मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभाजन से प्रभावित लोगों के साहस, संघर्ष और जज्बे को नमन किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि विभाजन ने कई जिंदगियां तहस-नहस कर दीं, परिवार उजड़ गए और लोगों ने अपनों को खो दिया, लेकिन इसके बावजूद प्रभावित लोगों ने विपरीत परिस्थितियों से उबरकर अपनी जिंदगी को फिर से खड़ा किया और देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया। प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी 14 अगस्त 2026 को उनके संदेश की पुष्टि की है।

PM मोदी ने विभाजन की पीड़ा को किया याद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के अवसर पर 1947 के विभाजन के दौरान प्रभावित हुए लोगों को याद किया। उन्होंने कहा कि यह इतिहास का वह दौर था जिसने अनगिनत जिंदगियों को गहरे तौर पर प्रभावित किया। विभाजन के कारण परिवार बिछड़ गए, लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया और बड़ी संख्या में लोगों को अपना घर-बार छोड़कर विस्थापित होना पड़ा।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में उन लोगों के साहस को विशेष रूप से याद किया जिन्होंने इस भयानक दौर का सामना किया। उन्होंने कहा कि भारी कठिनाइयों के बावजूद लोगों ने अपनी जिंदगी को फिर से शुरू किया और शून्य से अपने भविष्य का निर्माण किया। उनके अनुसार, इन लोगों ने मुश्किल परिस्थितियों को अपनी कामयाबी में बदला और आगे चलकर देश के विकास में बड़ा योगदान दिया।

करोड़ों लोगों ने झेला था विस्थापन का दर्द

1947 में भारत की आजादी के साथ ही देश का विभाजन हुआ। विभाजन के कारण बड़ी संख्या में लोगों को अपने पुश्तैनी घर, जमीन, कारोबार और सामाजिक रिश्ते छोड़ने पड़े। पंजाब और बंगाल के विभाजन का असर विशेष रूप से व्यापक रहा और लाखों परिवारों को नए स्थानों पर जाकर अपनी जिंदगी दोबारा शुरू करनी पड़ी।

विभाजन केवल राजनीतिक या भौगोलिक सीमाओं के बदलने की घटना नहीं थी, बल्कि इसका असर आम लोगों के जीवन पर बेहद गहरा पड़ा। परिवारों के बिछड़ने, संपत्ति और घर छोड़ने तथा हिंसा के कारण लोगों को भारी मानसिक और सामाजिक पीड़ा से गुजरना पड़ा। इसी मानवीय त्रासदी को याद करने के लिए 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में याद किया जाता है।

‘शून्य से जिंदगी फिर बनाई’

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में विभाजन पीड़ितों के संघर्ष को विशेष महत्व दिया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने सब कुछ खो दिया था, उन्होंने परिस्थितियों के सामने हार नहीं मानी। उन्होंने नए स्थानों पर जाकर अपनी जिंदगी दोबारा शुरू की और अपनी मेहनत, साहस और संकल्प से आगे बढ़े।

इन लोगों ने न केवल अपने परिवारों को संभाला, बल्कि व्यापार, शिक्षा, उद्योग, कृषि और विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देते हुए नए भारत के निर्माण में भी भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री ने उनकी जीवन-यात्रा को मानवीय जज्बे और दृढ़ संकल्प की मिसाल बताया।

PM मोदी ने सद्भाव और भाईचारे पर दिया जोर

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में विभाजन की त्रासदी को याद करने के साथ-साथ वर्तमान और भविष्य के लिए भी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यह दिन देश में आपसी सद्भाव और भाईचारे को बनाए रखने के संकल्प को और मजबूत करने वाला होना चाहिए।

उन्होंने लोगों से एकजुटता और सामाजिक सद्भाव की भावना को मजबूत करने की अपील की। प्रधानमंत्री के संदेश का जोर इस बात पर रहा कि इतिहास के दर्दनाक अध्यायों को याद करते हुए समाज को आगे बढ़ना चाहिए और देश की एकता को और मजबूत करना चाहिए।

‘विकसित भारत’ के संकल्प से जोड़ा संदेश

प्रधानमंत्री ने विभाजन पीड़ितों के साहस को याद करते हुए देश को ‘विकसित भारत’ के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने बेहद कठिन परिस्थितियों में अपनी जिंदगी को फिर से बनाया, उनकी यात्रा आज की पीढ़ी को भी प्रेरणा देती है।

उनके मुताबिक, विपरीत परिस्थितियों से निकलकर सफलता हासिल करने वाले लोगों का संघर्ष यह बताता है कि मजबूत संकल्प और मेहनत के जरिए बड़ी से बड़ी चुनौती का सामना किया जा सकता है। यही भावना देश के विकास और भविष्य के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

PM मोदी ने एक और पोस्ट में संस्कृत श्लोक साझा किया

प्रधानमंत्री ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के आसपास एक अन्य पोस्ट में संस्कृत सुभाषित भी साझा किया, जिसमें दृढ़ संकल्प, प्रयास और कठिन परिस्थितियों से पार पाने की भावना को रेखांकित किया गया। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, 13 अगस्त को साझा किए गए इस संदेश में विपरीत परिस्थितियों को अनुकूल बनाने के लिए निरंतर प्रयास और साहस के महत्व को उजागर किया गया था।

प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए श्लोक का भाव यह है कि निरंतर प्रयास और उद्यम से मनुष्य विभिन्न उपलब्धियां हासिल कर सकता है, जबकि केवल भय या निराशा की बात करने से कोई समाधान नहीं निकलता। इस संदेश को विभाजन की पीड़ा से उबरकर आगे बढ़े लोगों के संघर्ष से भी जोड़ा जा सकता है।

विभाजन की याद और आज का भारत

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का उद्देश्य केवल अतीत की त्रासदी को याद करना नहीं है, बल्कि उस दौर से मिले सबक को वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाना भी है। विभाजन ने यह दिखाया कि राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों का सबसे गहरा असर आम लोगों पर पड़ता है।

आज जब भारत अपनी आजादी की वर्षगांठ की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में 14 अगस्त का दिन उन परिवारों और लोगों को याद करने का अवसर देता है जिन्होंने आजादी के साथ-साथ विस्थापन और हिंसा की पीड़ा भी झेली थी। यह दिन उन लोगों के योगदान को भी याद करता है जिन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद नए भारत में अपनी जगह बनाई।

इतिहास से सीख लेने का संदेश

प्रधानमंत्री के संदेश में एक तरफ विभाजन के दौरान हुई मानवीय त्रासदी की स्मृति है, तो दूसरी तरफ उससे उबरने वाले लोगों के साहस की कहानी भी है। उनका कहना है कि विभाजन से प्रभावित लोगों की जीवन-यात्रा हमें मानवीय जज्बे की ताकत की याद दिलाती है।

ऐसे में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस देश के लिए इतिहास को याद करने और सामाजिक एकता के महत्व को समझने का अवसर बन जाता है। 14 अगस्त को विभाजन के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देते हुए प्रधानमंत्री ने सद्भाव, एकजुटता और देश के विकास के संकल्प को आगे बढ़ाने का संदेश दिया है।

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