27 वार, 1.54 लाख रुपये और iPhone... 'बाबू' से खुला राज, ऐसे पकड़े गए प्रिंसिपल के दो नाबालिग हत्यारे
'बाबू' बना पहला सुराग: हत्या से पहले रूपा रेड्डी की आखिरी फोन कॉल में बोले गए 'बाबू' शब्द ने पुलिस को स्कूल के छात्रों की ओर जांच मोड़ने में मदद की।
तेलंगाना के नालगोंडा जिले के कोंडामल्लेपल्ली में एक प्राइवेट स्कूल की प्रिंसिपल और डायरेक्टर कल्लू रूपा रेड्डी की हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझाने का दावा किया है। पुलिस के मुताबिक, इस सनसनीखेज वारदात के पीछे उसी स्कूल के 10वीं कक्षा के दो नाबालिग छात्र थे। आरोप है कि दोनों ने लूट के इरादे से रूपा रेड्डी के घर में घुसकर उन पर चाकू से करीब 27 वार किए और उनकी हत्या कर दी। जांच में पुलिस को आरोपियों तक पहुंचाने वाले कई अहम सुराग मिले, जिनमें मृतका की आखिरी फोन कॉल में बोला गया शब्द 'बाबू', CCTV फुटेज, खून लगे नोट, अचानक शुरू हुई खर्चीली जिंदगी और आरोपियों के पास से बरामद iPhone और नकदी शामिल हैं।
घर में अकेली थीं रूपा रेड्डी, सुबह सामने आया खौफनाक सच
रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 48 वर्षीय रूपा रेड्डी कोंडामल्लेपल्ली स्थित नागार्जुन पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल और डायरेक्टर थीं। घटना से पहले वह अपने पति के साथ हैदराबाद गई थीं, लेकिन पति के वहीं रुकने के बाद वह कोंडामल्लेपल्ली लौट आई थीं। उन्होंने स्कूल में काम किया और बाद में अपने घर चली गईं। अगले दिन जब उनके पति ने उन्हें फोन किया और फोन का कोई जवाब नहीं मिला, तो उन्होंने पड़ोसियों को घर जाकर देखने के लिए कहा। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और घर के अंदर रूपा रेड्डी मृत मिलीं। उनके शरीर पर कई गंभीर चाकू के घाव थे। शुरुआती रिपोर्टों में 27 वार की बात सामने आई थी, जबकि घटना के शुरुआती चरण में पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर चोटों की सटीक संख्या की पुष्टि होने की बात कही थी।
आखिरी फोन कॉल में 'बाबू' ने बदली जांच की दिशा
पुलिस की जांच में सबसे अहम सुराग मृतका की आखिरी फोन कॉल से मिला। रिपोर्ट के अनुसार, हमले से पहले रूपा रेड्डी ने अपनी रिश्तेदार से फोन पर बात की थी और बातचीत के दौरान उन्होंने आखिरी बार 'बाबू' शब्द कहा। इसके बाद उनका फोन बंद हो गया। पुलिस ने इस शब्द को बेहद गंभीरता से लिया और यह जांच शुरू की कि रूपा रेड्डी अपने आसपास के किन लोगों या छात्रों को इस संबोधन से बुलाती थीं।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि स्कूल में छात्रों को 'बाबू' कहकर संबोधित किया जाता था। इसके बाद जांच का फोकस स्कूल के छात्रों की ओर गया। पुलिस ने स्कूल से जुड़े कई छात्रों की जानकारी जुटाई और उन विद्यार्थियों पर विशेष नजर रखी, जिनका व्यवहार घटना के बाद संदिग्ध लग रहा था। यही एक छोटा-सा शब्द धीरे-धीरे पुलिस को आरोपियों तक पहुंचाने वाली महत्वपूर्ण कड़ी बन गया।
13 छात्रों से पूछताछ, फिर दो पर गहराया शक
पुलिस के मुताबिक, जांच आगे बढ़ने पर करीब 13 छात्रों को चिन्हित किया गया। इनमें से पांच छात्रों से पूछताछ की गई। पूछताछ और अन्य सुरागों के आधार पर 10वीं कक्षा के दो छात्रों पर पुलिस का शक गहराने लगा। दोनों की गतिविधियां और घटना के बाद उनके खर्च करने के तरीके जांचकर्ताओं को असामान्य लगे।
पुलिस ने पाया कि दोनों छात्र अचानक काफी पैसे खर्च कर रहे थे और महंगे सामान तथा मौज-मस्ती पर रकम उड़ा रहे थे। उनके पास इतनी रकम कहां से आई, यह सवाल जांच का अहम हिस्सा बन गया। इसी दौरान CCTV फुटेज और दूसरे तकनीकी सबूतों ने पुलिस के शक को और मजबूत किया।
अचानक बदल गई छात्रों की लाइफस्टाइल
जांच में पुलिस को कथित तौर पर पता चला कि दोनों छात्र एक ही हॉस्टल के कमरे में रह चुके थे और उन्हें महंगी बाइक, फोन और मौज-मस्ती का शौक था। पुलिस के अनुसार, दोनों सोशल मीडिया और YouTube पर कम समय में ज्यादा पैसा कमाने के तरीकों की तलाश कर रहे थे। एक आरोपी के बारे में यह भी सामने आया कि वह पहले हॉस्टल में रहता था और उसकी जीवनशैली को लेकर स्कूल प्रशासन ने आपत्ति जताई थी।
पुलिस के मुताबिक, दोनों छात्रों की आर्थिक जरूरतों और महंगी चीजों के प्रति बढ़ती चाहत ने उन्हें गलत रास्ते पर धकेला। जांचकर्ताओं को संदेह हुआ कि हत्या के पीछे केवल पुरानी नाराजगी नहीं, बल्कि पैसे हासिल करने की योजना भी थी।
प्रिंसिपल की डांट से पैदा हुई थी नाराजगी
पुलिस के अनुसार, दोनों छात्रों के पास हॉस्टल में एक फोन और कुछ नकदी मिली थी। इस मामले को लेकर रूपा रेड्डी ने उन्हें फटकार लगाई थी और कथित तौर पर उनके व्यवहार की जानकारी उनके परिवारों को देने की चेतावनी दी थी। यही बात दोनों छात्रों के मन में प्रिंसिपल के खिलाफ नाराजगी का कारण बनी।
जांच में यह भी सामने आया कि रूपा रेड्डी ने छात्रों की गतिविधियों और उनके खर्चीले व्यवहार को लेकर आपत्ति जताई थी। पुलिस का कहना है कि इसी नाराजगी के साथ पैसे की जरूरत और आसान तरीके से पैसा हासिल करने की चाहत ने दोनों को कथित तौर पर लूट की योजना बनाने की ओर धकेला।
हत्या से पहले की गई थी रेकी
पुलिस के मुताबिक, दोनों छात्रों ने वारदात को अचानक अंजाम नहीं दिया, बल्कि पहले से इसकी तैयारी की थी। उन्होंने कथित तौर पर हत्या से कुछ दिन पहले रूपा रेड्डी के घर की रेकी की थी। उन्हें जानकारी थी कि स्कूल से संबंधित रकम घर में रखी जा सकती है। इसी जानकारी के आधार पर उन्होंने घर में घुसकर नकदी चोरी करने की योजना बनाई।
घटना वाले दिन दोनों ने कथित तौर पर अपने कपड़े बदले, चाकू और दस्ताने खरीदे और चेहरे ढककर रूपा रेड्डी के घर की तरफ पहुंचे। घर के सामने CCTV होने की जानकारी होने के कारण उन्होंने सामने से जाने के बजाय पीछे के रास्ते का इस्तेमाल किया। पुलिस के अनुसार, यह पूरी तैयारी इस बात की ओर इशारा करती है कि वारदात को पहले से सोच-समझकर अंजाम देने का आरोप है।
घर में घुसे तो प्रिंसिपल ने पहचान लिया
पुलिस की जांच के मुताबिक, दोनों छात्र पीछे के रास्ते से घर में दाखिल हुए। कथित तौर पर उनका उद्देश्य नकदी और अन्य कीमती सामान चोरी करना था। लेकिन इसी दौरान रूपा रेड्डी ने उन्हें देख लिया और पहचान लिया। पुलिस के अनुसार, एक आरोपी का मास्क भी गिर गया था, जिससे उसकी पहचान सामने आने का खतरा बढ़ गया।
इसके बाद स्थिति अचानक हिंसक हो गई। पुलिस का आरोप है कि पहचान उजागर होने के डर से दोनों ने रूपा रेड्डी पर चाकू से हमला कर दिया। उनके शरीर पर करीब 27 वार किए गए। इसके बाद आरोपी कथित तौर पर घर से नकदी और उनका मोबाइल फोन लेकर पीछे के रास्ते से फरार हो गए।
1.54 लाख रुपये और खून लगे नोटों ने खोला राज
पुलिस की जांच में सबसे अहम भौतिक सबूतों में से एक 1.54 लाख रुपये की नकदी रही। दोनों संदिग्धों को जब पुलिस ने पूछताछ के लिए पकड़ा, तो उनके पास बड़ी मात्रा में कैश मिला। पुलिस के मुताबिक, रकम के स्रोत को लेकर छात्रों के जवाब संतोषजनक नहीं थे।
जांच के दौरान पुलिस को कथित तौर पर 500 रुपये के तीन नोटों पर खून के धब्बे मिले। इन नोटों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया और पुलिस के अनुसार, जांच में इन पर मृतका का खून होने की पुष्टि हुई। इस सबूत ने छात्रों और हत्या के बीच कड़ी को और मजबूत किया।
बाइक पर जाते हुए पकड़े गए
जांच के दौरान CCTV फुटेज में दो छात्रों की गतिविधियां पुलिस के सामने आईं। इसके बाद पुलिस ने डोनियाला X-रोड के पास बाइक से जा रहे दोनों छात्रों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। उनके पास से बड़ी मात्रा में नकदी मिलने के बाद पुलिस का शक और मजबूत हो गया।
पूछताछ के दौरान पुलिस के अनुसार, दोनों ने कथित तौर पर हत्या और लूट में अपनी भूमिका स्वीकार की। इसके बाद पुलिस ने उनकी निशानदेही और जांच के आधार पर कई महत्वपूर्ण सामान बरामद किए।
iPhone ने भी जांच में जोड़ी अहम कड़ी
पुलिस ने आरोपियों के पास से मृतका का मोबाइल फोन बरामद करने का दावा किया है। इसके अलावा एक iPhone, जिसकी कीमत करीब 60 हजार रुपये बताई गई है, भी बरामद हुआ। पुलिस के मुताबिक, यह फोन भी उनकी अचानक बदली आर्थिक स्थिति और वारदात के बाद किए गए खर्चों की जांच में महत्वपूर्ण साबित हुआ।
इसके साथ ही हत्या में इस्तेमाल चाकू, दस्ताने, मास्क और दो अन्य मोबाइल फोन भी बरामद किए गए। इन बरामदगी से पुलिस ने कथित तौर पर वारदात की पूरी कड़ी जोड़ने में मदद मिली।
70 से ज्यादा CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली
इस मामले को सुलझाने के लिए नालगोंडा पुलिस ने बड़े स्तर पर तकनीकी जांच की। जिला पुलिस अधीक्षक शरत चंद्र पवार के नेतृत्व में और देवरकोंडा DSP की निगरानी में पांच विशेष पुलिस टीमों का गठन किया गया। टीमों ने घटनास्थल से फोरेंसिक सबूत जुटाए और फिंगरप्रिंट, डॉग स्क्वॉड, CCTV तथा तकनीकी विश्लेषण का इस्तेमाल किया।
पुलिस ने करीब 30 किलोमीटर के दायरे में 70 से अधिक CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली और 80 से ज्यादा संदिग्धों से पूछताछ की। इस लंबी जांच के बाद पुलिस छात्रों की गतिविधियों, उनके संपर्कों, पैसों के स्रोत और वारदात के बाद उनके व्यवहार को जोड़ने में सफल रही।
नाबालिग होने के कारण आगे की कानूनी प्रक्रिया अलग
पुलिस के मुताबिक दोनों आरोपी 10वीं कक्षा के नाबालिग छात्र हैं। इसलिए उनकी गिरफ्तारी के बाद मामले की कानूनी प्रक्रिया किशोर न्याय व्यवस्था के तहत आगे बढ़ेगी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर मामले में आगे की कार्रवाई शुरू की है और उन्हें Juvenile Justice Court के समक्ष पेश किए जाने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
यह मामला इसलिए भी बेहद गंभीर माना जा रहा है क्योंकि पुलिस के अनुसार इसमें कम उम्र के छात्रों पर एक ऐसी वारदात की योजना बनाने और उसे अंजाम देने का आरोप है, जिसमें एक स्कूल प्रिंसिपल की जान चली गई। घटना ने बच्चों के बीच बढ़ती आर्थिक आकांक्षाओं, सोशल मीडिया से प्रभावित जीवनशैली और गलत तरीके से जल्दी पैसा कमाने की चाहत को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
'बाबू' से शुरू हुई जांच, चाकू और iPhone तक पहुंची पुलिस
रूपा रेड्डी की आखिरी बातचीत में सुना गया एक शब्द 'बाबू' शुरुआत में शायद मामूली सुराग लगा हो, लेकिन जांच के दौरान यही शब्द पुलिस के लिए महत्वपूर्ण कड़ी बन गया। इसी से स्कूल के छात्रों की ओर जांच मुड़ी, फिर संदिग्ध छात्रों की पहचान हुई। इसके बाद CCTV फुटेज, उनकी अचानक बदली जीवनशैली, 1.54 लाख रुपये की नकदी, खून लगे नोट, iPhone, मृतका का फोन और अन्य सामान ने जांच को आगे बढ़ाया।
इस तरह एक सामान्य-सा शब्द पुलिस को संदिग्धों तक ले गया और तकनीकी तथा फोरेंसिक सबूतों ने उस शक को मजबूत किया। पुलिस के अनुसार, अब तक की जांच में दो नाबालिग छात्रों को इस जघन्य हत्या का आरोपी बनाया गया है। मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया और अदालत में पेश होने वाले साक्ष्यों से यह तय होगा कि आरोपों की अंतिम स्थिति क्या रहती है।
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