NEET पेपर लीक में NTA के सिस्टम की पोल! CBI चार्जशीट में एक्सपर्ट के ऐप और फोन रिकॉर्ड से मिले अहम सबूत

NEET पेपर लीक मामले में CBI की चार्जशीट ने परीक्षा प्रश्नपत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जांच एजेंसी ने NTA के ओखला स्थित भवन में पेपर सेटिंग, अनुवाद और बैक-ट्रांसलेशन के दौरान सामने आई कथित सुरक्षा खामियों की पड़ताल की। चार्जशीट में तीन पुणे स्थित विषय विशेषज्ञों समेत 13 आरोपियों का जिक्र है। CBI ने एक NTA एक्सपर्ट की सोसायटी के access-control ऐप के रिकॉर्ड, फोन रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल सबूतों के आधार पर कथित पेपर लीक की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश की है। अब मामले में अदालत इन आरोपों और सबूतों की जांच करेगी।

Aug 07, 2026 - 17:12
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NEET पेपर लीक में NTA के सिस्टम की पोल! CBI चार्जशीट में एक्सपर्ट के ऐप और फोन रिकॉर्ड से मिले अहम सबूत

NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI की चार्जशीट ने परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जांच एजेंसी ने अपनी जांच में कथित तौर पर NTA के पेपर तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े विशेषज्ञों की भूमिका, डिजिटल रिकॉर्ड, फोन कॉल और एक्सेस-कंट्रोल सिस्टम से मिले सबूतों को अहम आधार बनाया है। चार्जशीट में 13 आरोपियों को लेकर जांच के निष्कर्ष सामने रखे गए हैं और एजेंसी का दावा है कि पेपर तैयार करने की प्रक्रिया में मौजूद कई खामियों का फायदा उठाकर प्रश्नपत्र तक पहुंच बनाई गई।

CBI की जांच के मुताबिक, पुणे के तीन विषय विशेषज्ञ भी इस कथित नेटवर्क का हिस्सा थे। ये सभी उन 13 आरोपियों में शामिल हैं जिनके खिलाफ एजेंसी ने कार्रवाई की है। जांच में यह सामने आने का दावा किया गया है कि इन विशेषज्ञों को NEET के प्रश्नपत्र तैयार करने, अनुवाद और बैक-ट्रांसलेशन की प्रक्रिया के दौरान प्रश्नों तक महत्वपूर्ण स्तर की पहुंच हासिल थी। इसी पहुंच का कथित तौर पर दुरुपयोग कर प्रश्नों को परीक्षा से पहले बाहर पहुंचाया गया।

जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA की ओखला स्थित उस इमारत से जुड़ा है, जहां NEET प्रश्नपत्रों की सेटिंग, विभिन्न भाषाओं में अनुवाद और फिर बैक-ट्रांसलेशन का काम किया जाता था। CBI का दावा है कि इसी प्रक्रिया से जुड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल में कई खामियां थीं। आरोपियों ने कथित तौर पर इन्हीं कमजोरियों का फायदा उठाकर प्रश्नपत्र की संवेदनशील सामग्री तक पहुंच बनाई।

CBI ने अपनी जांच में एक NTA विशेषज्ञ की सोसायटी से जुड़े access-control ऐप के रिकॉर्ड को भी महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत के तौर पर देखा है। इस तरह के ऐप में किसी व्यक्ति के परिसर में प्रवेश और बाहर निकलने से संबंधित डिजिटल जानकारी दर्ज हो सकती है। जांच एजेंसी ने इन रिकॉर्डों का इस्तेमाल यह पता लगाने के लिए किया कि संबंधित लोग किस समय और किन परिस्थितियों में उन स्थानों पर मौजूद थे, जहां प्रश्नपत्र से जुड़ा संवेदनशील काम चल रहा था।

इसके साथ ही आरोपियों के फोन रिकॉर्ड भी जांच का अहम हिस्सा बने। CBI ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मोबाइल फोन से मिले डेटा और अन्य डिजिटल सामग्री की पड़ताल कर कथित तौर पर आरोपियों के बीच संपर्क और गतिविधियों की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश की। एजेंसी पहले भी इस मामले में जब्त मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का फोरेंसिक विश्लेषण कर रही थी।

जांच एजेंसी के अनुसार, प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल विशेषज्ञों के पास परीक्षा से जुड़ी अत्यंत गोपनीय जानकारी तक पहुंच थी। इनमें से कुछ विशेषज्ञ प्रश्नपत्र तैयार करने के साथ-साथ उसका अनुवाद भी करते थे। CBI की जांच में सामने आया कि पुणे की जीव विज्ञान विशेषज्ञ मनीषा गुरुनाथ मंधारे ने कथित तौर पर बॉटनी और जूलॉजी से जुड़े प्रश्नों के अनुवाद का काम किया था, जिससे उन्हें प्रश्नपत्र के बड़े हिस्से तक पहुंच मिली।

इसी तरह, सेवानिवृत्त रसायन विज्ञान व्याख्याता पीवी कुलकर्णी पर भी प्रश्नपत्र की गोपनीय सामग्री तक पहुंच होने और उसे कथित तौर पर आगे पहुंचाने का आरोप लगाया गया। CBI ने उन्हें NEET-UG 2026 प्रश्नपत्र लीक का कथित स्रोत बताया था। एजेंसी के अनुसार, वह NTA की ओर से परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े हुए थे और उनके पास प्रश्नपत्र तक पहुंच थी।

फिजिक्स के प्रश्नों को लेकर भी जांच में एक अलग कड़ी सामने आई। CBI के अनुसार, पुणे में कार्यरत शिक्षिका मनीषा संजय हवालेदार NTA की विशेषज्ञ थीं और उन्हें NEET-UG 2026 के फिजिक्स प्रश्नपत्र तक पूर्ण पहुंच थी। एजेंसी ने आरोप लगाया कि अप्रैल 2026 में उन्होंने फिजिक्स के कई प्रश्न सह-आरोपी मनीषा मंधारे के साथ साझा किए और बाद में जांच में उन प्रश्नों का वास्तविक परीक्षा प्रश्नपत्र से मिलान पाया गया।

CBI की जांच में यह भी आरोप सामने आया कि प्रश्नपत्र से जुड़ी सामग्री को कुछ चुनिंदा छात्रों तक पहुंचाने के लिए विशेष कोचिंग या तैयारी सत्र आयोजित किए गए। मनीषा मंधारे के बारे में एजेंसी ने आरोप लगाया कि उन्होंने अप्रैल में संभावित NEET उम्मीदवारों को जुटाकर अपने पुणे स्थित आवास पर विशेष कक्षाएं आयोजित कीं और कथित तौर पर परीक्षा से जुड़ी सामग्री साझा की।

इस मामले में लीक हुए प्रश्नों को उम्मीदवारों तक पहुंचाने के लिए डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल की भी जांच की गई। CBI ने पहले अदालत को बताया था कि कुछ आरोपियों के बीच Telegram के जरिए प्रश्नपत्र की PDF फाइलें साझा की गई थीं। एजेंसी ने कथित तौर पर Physics, Chemistry और Biology से संबंधित PDF फाइलें बरामद करने की बात भी कही थी।

CBI ने इस मामले में एक कथित ‘गेस पेपर’ का भी जिक्र किया था। एजेंसी के अनुसार, लगभग 150 पन्नों के इस दस्तावेज में 410 प्रश्न थे और इनमें से करीब 120 प्रश्न कथित तौर पर परीक्षा के Chemistry पेपर में दिखाई दिए। जांच एजेंसी का दावा था कि यह सामग्री परीक्षा से कई सप्ताह पहले कुछ छात्रों के पास पहुंच गई थी।

मामले में लातूर के डॉक्टर मनोज भगवानराव शिरूरे और पुणे के फिजिक्स फैकल्टी तेजस हरषदकुमार शाह समेत कई अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी हुई। CBI के अनुसार, शिरूरे ने कथित तौर पर कुछ छात्रों को लीक हुए Chemistry प्रश्नों तक पहुंच दिलाने में भूमिका निभाई, जबकि तेजस शाह पर कथित रूप से लीक हुए Physics प्रश्न छात्रों तक पहुंचाने का आरोप लगाया गया।

चार्जशीट में CBI ने कथित पेपर लीक की पूरी कड़ी को समझने के लिए डिजिटल और भौतिक दोनों तरह के सबूतों का इस्तेमाल किया है। एक्सेस-कंट्रोल रिकॉर्ड से लेकर फोन डेटा, बैंक दस्तावेज, मोबाइल फोन और लैपटॉप तक की जांच की गई। एजेंसी का उद्देश्य यह पता लगाना था कि प्रश्नपत्र की गोपनीय सामग्री किस स्तर पर बाहर निकली, किन लोगों के बीच पहुंची और किन छात्रों को इसका फायदा मिला।

इस मामले ने NTA की प्रश्नपत्र सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। परीक्षा प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में कई स्तरों पर विशेषज्ञ, अनुवादक और अन्य कर्मचारी शामिल होते हैं। प्रश्नों की सेटिंग के बाद अनुवाद और बैक-ट्रांसलेशन की प्रक्रिया में भी अलग-अलग लोगों को संवेदनशील सामग्री तक पहुंच मिलती है। ऐसे में किसी भी स्तर पर सुरक्षा में कमी पूरी परीक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।

CBI ने अपनी जांच के दौरान NTA से परीक्षा प्रक्रिया में शामिल लोगों की जानकारी भी मांगी थी। एजेंसी ने प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों और अनुवादकों की सूची हासिल कर उनके फोन रिकॉर्ड और आपसी संपर्क की जांच की। इसका उद्देश्य यह पता लगाना था कि गिरफ्तार आरोपियों और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े लोगों के बीच कोई संपर्क था या नहीं।

NEET-UG 2026 में 3 मई को परीक्षा आयोजित की गई थी और इसमें 22.7 लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था। कथित पेपर लीक के बाद NTA ने 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी थी। इसके बाद 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित की गई और 16 जुलाई को परिणाम घोषित किए गए। इतने बड़े स्तर पर परीक्षा दोबारा कराने से सरकार और परीक्षा एजेंसी पर भी भारी प्रशासनिक और वित्तीय दबाव पड़ा।

CBI के अनुसार, इस मामले में सरकारी खजाने को 600 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने का दावा भी चार्जशीट में किया गया है। इसके अलावा, कथित पेपर लीक का असर लाखों छात्रों पर पड़ा, जिन्होंने महीनों तक तैयारी करने के बाद परीक्षा दी थी। दोबारा परीक्षा आयोजित होने से छात्रों को अतिरिक्त समय, संसाधन और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ा।

पूरे मामले में सबसे गंभीर सवाल यह है कि यदि परीक्षा के अंतिम प्रश्नपत्र तक पहुंच रखने वाले लोगों ने वास्तव में गोपनीय सामग्री बाहर पहुंचाई, तो NTA की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था में किस स्तर पर चूक हुई। एक्सेस-कंट्रोल रिकॉर्ड और फोन डेटा जैसे डिजिटल सबूत इसी सवाल का जवाब खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

हालांकि, चार्जशीट में लगाए गए आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। किसी भी आरोपी को तब तक दोषी नहीं माना जा सकता जब तक अदालत में आरोप साबित न हो जाएं और न्यायिक फैसला सामने न आ जाए। CBI की चार्जशीट जांच एजेंसी के निष्कर्ष और आरोपों को सामने रखती है, जबकि अंतिम फैसला अदालत करेगी।

कुल मिलाकर, NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI की चार्जशीट ने प्रश्नपत्र तैयार करने की पूरी व्यवस्था और उसकी सुरक्षा को सवालों के घेरे में ला दिया है। तीन पुणे-आधारित विषय विशेषज्ञों समेत 13 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई, NTA विशेषज्ञ की सोसायटी के access-control ऐप के रिकॉर्ड, फोन डेटा और अन्य डिजिटल सबूतों की जांच से कथित साजिश की परतें खोलने की कोशिश की गई है। अब अदालत में इन सबूतों की जांच होगी और आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि प्रश्नपत्र की गोपनीय सामग्री किस स्तर पर बाहर निकली और इस पूरे नेटवर्क में किस-किस की भूमिका थी।

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