दक्षिण चीन सागर में चीन की नई चाल पर अमेरिका सख्त, फिलीपींस के समर्थन में खुलकर आया वॉशिंगटन
दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपींस के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। स्कारबोरो रीफ को राष्ट्रीय प्रकृति रिजर्व घोषित करने के चीन के कदम पर अमेरिका ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे खारिज कर दिया है और फिलीपींस के समर्थन में खड़े होने का संदेश दिया है। स्कारबोरो रीफ लंबे समय से दोनों देशों के बीच विवाद का केंद्र रहा है। चीन इसे पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा कदम बता रहा है, जबकि फिलीपींस और अमेरिका को आशंका है कि इसके जरिए चीन विवादित क्षेत्र पर अपना प्रशासनिक और रणनीतिक नियंत्रण मजबूत करना चाहता है। जानिए क्या है स्कारबोरो रीफ विवाद, चीन का नया कदम क्यों महत्वपूर्ण है और अमेरिका के समर्थन से दक्षिण चीन सागर के समीकरण पर क्या असर पड़ सकता है।
दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपींस के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने चीन के स्कारबोरो रीफ को राष्ट्रीय प्रकृति रिजर्व घोषित करने के कदम को खारिज कर दिया है। वॉशिंगटन ने इस कार्रवाई को लेकर गंभीर आपत्ति जताते हुए फिलीपींस के साथ खड़े होने का संदेश दिया है। स्कारबोरो रीफ को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है और चीन के नए कदम ने इस संवेदनशील समुद्री क्षेत्र में तनाव और बढ़ा दिया है।
अमेरिका का कहना है कि चीन की ओर से स्कारबोरो रीफ के आसपास प्रशासनिक और कानूनी नियंत्रण मजबूत करने की कोशिश को केवल पर्यावरण संरक्षण के कदम के तौर पर नहीं देखा जा सकता। वॉशिंगटन के मुताबिक, इस तरह की कार्रवाई विवादित क्षेत्र पर चीन के दावे को मजबूत करने और वहां अपनी मौजूदगी को संस्थागत रूप देने की कोशिश का हिस्सा हो सकती है।
स्कारबोरो रीफ दक्षिण चीन सागर में स्थित एक महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र है। यह फिलीपींस के लूजोन द्वीप से लगभग 220 किलोमीटर दूर है। चीन इस क्षेत्र पर अपना दावा करता है और इसे अपने प्रशासनिक ढांचे में शामिल करने की कोशिश करता रहा है, जबकि फिलीपींस भी इस समुद्री क्षेत्र पर अपने अधिकार का दावा करता है। यही वजह है कि यह रीफ दोनों देशों के बीच समुद्री विवाद का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
चीन ने हाल में स्कारबोरो रीफ के आसपास राष्ट्रीय प्रकृति रिजर्व स्थापित करने का फैसला लिया। बीजिंग की ओर से इसे समुद्री पारिस्थितिकी और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी पहल के तौर पर पेश किया गया है। चीन का दावा है कि इस कदम का उद्देश्य क्षेत्र में जैव विविधता, समुद्री पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा करना है। लेकिन फिलीपींस और अमेरिका इसे व्यापक रणनीतिक संदर्भ में देख रहे हैं।
अमेरिका ने चीन के इस कदम को स्वीकार करने से इनकार करते हुए फिलीपींस के साथ अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। वॉशिंगटन और मनीला के बीच लंबे समय से रक्षा सहयोग मौजूद है। दोनों देशों के बीच Mutual Defense Treaty है, जिसके तहत कुछ परिस्थितियों में एक-दूसरे की सहायता करने की प्रतिबद्धता है। दक्षिण चीन सागर में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका लगातार इस संधि के महत्व को रेखांकित करता रहा है।
स्कारबोरो रीफ का विवाद नया नहीं है। वर्ष 2012 में चीन और फिलीपींस के बीच यहां गंभीर गतिरोध पैदा हुआ था। इसके बाद से चीन ने इस क्षेत्र में अपनी समुद्री मौजूदगी बनाए रखी है। फिलीपींस का कहना है कि चीन की गतिविधियों के कारण उसके मछुआरों और सरकारी जहाजों के लिए क्षेत्र में काम करना मुश्किल होता जा रहा है।
फिलीपींस ने पहले भी चीन पर अपने समुद्री अधिकारों का उल्लंघन करने और उसके जहाजों को परेशान करने के आरोप लगाए हैं। चीन इन आरोपों को खारिज करता रहा है और दक्षिण चीन सागर के बड़े हिस्से पर अपने ऐतिहासिक अधिकार का दावा करता है। इस विवाद में अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून और 2016 के अंतरराष्ट्रीय पंचाट के फैसले का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है।
2016 में हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय ने फिलीपींस की ओर से दायर मामले में चीन के व्यापक ऐतिहासिक अधिकार के दावे को अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के अनुरूप नहीं माना था। चीन ने उस फैसले को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद भी दक्षिण चीन सागर में दोनों देशों के बीच विवाद जारी रहा और कई बार समुद्री टकराव जैसी परिस्थितियां पैदा हुईं।
अमेरिका लगातार यह कहता रहा है कि दक्षिण चीन सागर में अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए। वॉशिंगटन चीन के व्यापक समुद्री दावों को चुनौती देता रहा है और समय-समय पर इस क्षेत्र में Freedom of Navigation Operations भी करता है। चीन इन अमेरिकी गतिविधियों का विरोध करते हुए उन्हें क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताता है।
स्कारबोरो रीफ का रणनीतिक महत्व केवल क्षेत्रीय दावों तक सीमित नहीं है। दक्षिण चीन सागर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। इस क्षेत्र से बड़ी मात्रा में अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा संसाधनों की आवाजाही होती है। इसलिए यहां किसी भी बड़े सैन्य या समुद्री टकराव का असर केवल चीन और फिलीपींस तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र पर पड़ सकता है।
फिलीपींस के लिए स्कारबोरो रीफ का महत्व आर्थिक और सुरक्षा दोनों दृष्टि से है। स्थानीय मछुआरे लंबे समय से इस क्षेत्र के समुद्री संसाधनों पर निर्भर रहे हैं। फिलीपींस का आरोप है कि चीन की मौजूदगी के कारण उसके मछुआरों की गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। दूसरी ओर, चीन का कहना है कि वह अपने क्षेत्रीय अधिकारों और समुद्री संसाधनों की रक्षा कर रहा है।
अमेरिका और फिलीपींस के बीच पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा सहयोग भी बढ़ा है। दोनों देशों ने संयुक्त सैन्य अभ्यास बढ़ाए हैं और फिलीपींस में अमेरिकी सैन्य पहुंच को लेकर भी सहयोग मजबूत हुआ है। ऐसे में दक्षिण चीन सागर में चीन के साथ किसी भी नए विवाद की स्थिति में अमेरिका की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
चीन की ओर से स्कारबोरो रीफ को प्रकृति रिजर्व घोषित करने के कदम को लेकर एक और चिंता यह है कि इससे क्षेत्र में चीन की प्रशासनिक मौजूदगी और मजबूत हो सकती है। यदि पर्यावरण संरक्षण के नाम पर नियम लागू किए जाते हैं तो भविष्य में मछली पकड़ने, समुद्री गतिविधियों और अन्य गतिविधियों पर नियंत्रण का सवाल उठ सकता है। फिलीपींस को आशंका है कि इसका इस्तेमाल उसके समुद्री अधिकारों को सीमित करने के लिए किया जा सकता है।
हालांकि चीन इस तरह की आशंकाओं को खारिज करता है। बीजिंग का कहना है कि उसके कदमों का उद्देश्य अपने समुद्री क्षेत्र और पर्यावरण की रक्षा करना है। चीन दक्षिण चीन सागर के बड़े हिस्से पर अपने संप्रभु अधिकार का दावा करता है और इस क्षेत्र में अन्य देशों की गतिविधियों पर भी आपत्ति जताता रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका का रुख इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच पहले से ही रणनीतिक प्रतिस्पर्धा चल रही है। ताइवान, दक्षिण चीन सागर, व्यापार, तकनीक और सैन्य प्रभाव जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है। फिलीपींस के साथ अमेरिका का मजबूत होता रक्षा संबंध चीन के लिए भी एक महत्वपूर्ण रणनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा सकता है।
दक्षिण चीन सागर में बढ़ते तनाव के बीच फिलीपींस की सरकार भी लगातार अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। मनीला अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर अपने समुद्री अधिकारों की बात करता है और अमेरिका समेत अन्य साझेदार देशों से सहयोग ले रहा है। चीन दूसरी ओर फिलीपींस पर बाहरी शक्तियों के सहारे क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने का आरोप लगाता है।
आने वाले समय में स्कारबोरो रीफ को लेकर स्थिति और संवेदनशील हो सकती है। यदि चीन वहां प्रकृति रिजर्व से जुड़े नियमों को लागू करने की कोशिश करता है और फिलीपींस उसका विरोध करता है, तो समुद्र में दोनों देशों के जहाजों के बीच आमना-सामना बढ़ने की आशंका रहेगी। ऐसे किसी भी घटनाक्रम में अमेरिका की प्रतिक्रिया भी बेहद महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल अमेरिका ने चीन के कदम को खारिज कर फिलीपींस को यह संदेश दिया है कि वह दक्षिण चीन सागर में अपने सहयोगी के साथ खड़ा है। हालांकि, इस समर्थन का वास्तविक स्वरूप किसी संभावित सैन्य टकराव की स्थिति में क्या होगा, यह परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। Mutual Defense Treaty के तहत दोनों देशों की प्रतिबद्धताएं महत्वपूर्ण हैं, लेकिन हर समुद्री विवाद अपने आप सैन्य संघर्ष में बदल जाए, ऐसा जरूरी नहीं है।
कुल मिलाकर, स्कारबोरो रीफ को लेकर चीन का प्रकृति रिजर्व बनाने का फैसला दक्षिण चीन सागर के पुराने विवाद को एक नए चरण में ले आया है। चीन इसे पर्यावरण संरक्षण और अपने अधिकारों से जुड़ा कदम बता रहा है, जबकि फिलीपींस और अमेरिका इसे क्षेत्र पर चीन के नियंत्रण को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि चीन और फिलीपींस के बीच समुद्री तनाव किस दिशा में जाता है और अमेरिका अपने सहयोगी फिलीपींस के समर्थन को किस स्तर तक आगे बढ़ाता है।
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