बारुईपुर एनकाउंटर मामले में हाईकोर्ट सख्त: आरोपी की मुठभेड़ पर पुलिस से मांगी विस्तृत रिपोर्ट

बारुईपुर रेप और मर्डर केस में आरोपी प्रभाष मंडल के एनकाउंटर को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट ने पुलिस से जवाब मांगा है। अदालत ने बारुईपुर पुलिस अधीक्षक से हलफनामे के जरिए विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें एनकाउंटर की परिस्थितियों और पुलिस कार्रवाई की जानकारी देनी होगी। याचिकाकर्ता ने पुलिस सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर पर्याप्त सुरक्षा होती तो आरोपी कथित रूप से हथियार नहीं छीन पाता। मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी, जहां पुलिस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

Aug 02, 2026 - 15:15
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बारुईपुर एनकाउंटर मामले में हाईकोर्ट सख्त: आरोपी की मुठभेड़ पर पुलिस से मांगी विस्तृत रिपोर्ट

पश्चिम बंगाल के बारुईपुर मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने पुलिस कार्रवाई को लेकर सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने उस मुठभेड़ (एनकाउंटर) को लेकर पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें 11 वर्षीय बच्ची के रेप और हत्या मामले के आरोपी प्रभाष मंडल की मौत हुई थी। अदालत ने पुलिस से यह बताने को कहा है कि किन परिस्थितियों में यह एनकाउंटर हुआ और इसके पीछे क्या घटनाक्रम रहा।

मामले की सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपब्रत चक्रवर्ती और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी चटर्जी शामिल थे, ने बारुईपुर के जिला पुलिस अधीक्षक (DSP) से विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि पुलिस को हलफनामे के रूप में रिपोर्ट पेश करनी होगी, जिसमें एनकाउंटर की परिस्थितियों और राज्य प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी जाए।

यह मामला एक जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास रंजन भट्टाचार्य ने अदालत के सामने पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आरोपी प्रभाष मंडल को गिरफ्तारी के बाद अपराध स्थल पर घटना के पुनर्निर्माण (क्राइम सीन रीक्रिएशन) के लिए ले जाया गया था। ऐसे में पुलिस को पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए थी।

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि यदि आरोपी की सुरक्षा के लिए उचित इंतजाम किए गए होते, तो वह कथित रूप से पुलिस का हथियार हासिल नहीं कर पाता। अधिवक्ता ने पुलिस के उस दावे पर सवाल उठाया, जिसमें कहा गया था कि आरोपी ने पुलिस की रिवॉल्वर छीनने की कोशिश की थी, जिसके बाद मुठभेड़ की स्थिति बनी।

पुलिस के अनुसार, आरोपी प्रभाष मंडल को अपराध स्थल पर ले जाया गया था ताकि मामले की जांच के तहत घटना का पुनर्निर्माण किया जा सके। इसी दौरान कथित तौर पर उसने पुलिसकर्मी से हथियार छीनने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस कार्रवाई में वह घायल हुआ और बाद में उसकी मौत हो गई। हालांकि, इस पूरी घटना को लेकर सवाल उठाए गए हैं और अब हाईकोर्ट ने पुलिस से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है।

हाईकोर्ट ने फिलहाल इस मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय पुलिस से पूरी जानकारी मांगी है। अदालत यह जानना चाहती है कि आरोपी को घटनास्थल पर ले जाने की प्रक्रिया क्या थी, सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी, घटना के समय कौन-कौन पुलिसकर्मी मौजूद थे और मुठभेड़ की स्थिति कैसे बनी।

इस मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को निर्धारित की गई है। उस दिन पुलिस द्वारा दाखिल की जाने वाली रिपोर्ट के आधार पर अदालत आगे की कार्रवाई पर विचार कर सकती है। हाईकोर्ट की निगरानी में अब यह जांच होगी कि पुलिस कार्रवाई नियमों और तय प्रक्रियाओं के अनुरूप थी या नहीं।

बारुईपुर का यह मामला पहले से ही काफी संवेदनशील बना हुआ है। 11 वर्षीय बच्ची के साथ कथित रेप और हत्या की घटना के बाद लोगों में आक्रोश देखा गया था। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद हुई एनकाउंटर की घटना ने मामले को और चर्चा में ला दिया, जिसके बाद अदालत में इसकी न्यायिक समीक्षा की मांग की गई।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, पुलिस मुठभेड़ों में यह जरूरी होता है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो और यह स्पष्ट किया जाए कि कार्रवाई किन परिस्थितियों में हुई। अदालत द्वारा रिपोर्ट मांगा जाना इसी प्रक्रिया का हिस्सा है, ताकि घटना से जुड़े सभी तथ्यों की जांच की जा सके।

फिलहाल कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश के बाद पुलिस को एनकाउंटर से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी अदालत के सामने रखनी होगी। अब सभी की नजर 18 अगस्त को होने वाली सुनवाई पर है, जहां पुलिस रिपोर्ट के आधार पर मामले की आगे की दिशा तय हो सकती है।

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