भारत-अफगान रिश्तों पर पाकिस्तान की आपत्ति, पाक सेना के बयान से बढ़ा सियासी विवाद
भारत और अफगानिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकियों को लेकर पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता DG ISPR के बयान से नया विवाद खड़ा हो गया है। रावलपिंडी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पाक सेना ने भारत-अफगान संबंधों पर सवाल उठाते हुए तालिबान और भारत के रिश्तों पर टिप्पणी की। इस बयान के बाद दक्षिण एशिया की कूटनीति, पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव और भारत की क्षेत्रीय भूमिका को लेकर बहस तेज हो गई है।
भारत और अफगानिस्तान के बीच बढ़ती कूटनीतिक नजदीकियों को लेकर पाकिस्तान की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई है। पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता DG ISPR ने भारत और अफगान तालिबान के संबंधों पर टिप्पणी करते हुए दोनों देशों के बीच बढ़ते संपर्कों पर सवाल उठाए हैं। रावलपिंडी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिए गए बयान के बाद क्षेत्रीय राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।
पाक सेना के प्रवक्ता ने भारत और अफगानिस्तान के रिश्तों को लेकर निशाना साधते हुए कहा कि किसी मुसलमान को काफिर से दोस्ती नहीं करनी चाहिए। उन्होंने तालिबान और भारत के बीच बढ़ते संबंधों पर टिप्पणी करते हुए इसे कथित तौर पर "मालिक और गुलाम" जैसा रिश्ता बताया। उनके इस बयान को भारत-अफगान संबंधों को लेकर पाकिस्तान की चिंता के तौर पर देखा जा रहा है।
पाकिस्तान की ओर से यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और अफगानिस्तान के बीच राजनयिक संपर्कों में कुछ सक्रियता देखने को मिली है। भारत लंबे समय से अफगान जनता के साथ मानवीय सहायता, विकास परियोजनाओं और आर्थिक सहयोग के जरिए जुड़ा रहा है। अफगानिस्तान में राजनीतिक बदलावों के बावजूद भारत ने वहां के लोगों के लिए सहायता जारी रखी है।
पाक सेना के प्रवक्ता ने अपने बयान में भारत की सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी और आरएसएस का भी जिक्र किया और तालिबान के साथ भारत के संबंधों को लेकर आरोप लगाए। हालांकि, भारत की ओर से पाकिस्तान के इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
भारत का रुख रहा है कि अफगानिस्तान के साथ उसके संबंध वहां के लोगों के हितों और क्षेत्रीय स्थिरता पर आधारित हैं। भारत ने हमेशा अफगानिस्तान में शांति, विकास और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग की बात कही है। भारत ने अफगान नागरिकों के लिए खाद्य सामग्री, दवाइयां और अन्य जरूरी सहायता भी उपलब्ध कराई है।
वहीं, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच रिश्तों में पिछले कुछ समय से तनाव देखने को मिला है। सीमा सुरक्षा, आतंकवादी गतिविधियों और राजनीतिक मतभेदों को लेकर दोनों देशों के बीच कई बार बयानबाजी हो चुकी है। पाकिस्तान का आरोप रहा है कि अफगान धरती का इस्तेमाल उसके खिलाफ गतिविधियों के लिए किया जाता है, जबकि अफगान पक्ष कई बार इन आरोपों को खारिज करता रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की चिंता का एक बड़ा कारण क्षेत्र में भारत की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता भी हो सकती है। अफगानिस्तान दक्षिण एशिया और मध्य एशिया के बीच रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान रखता है, इसलिए वहां प्रभाव बनाए रखने को लेकर क्षेत्रीय शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा रही है।
भारत और अफगानिस्तान के ऐतिहासिक संबंध सांस्कृतिक, व्यापारिक और विकास सहयोग पर आधारित रहे हैं। भारत ने अफगानिस्तान में संसद भवन, सड़क परियोजनाओं और अन्य विकास कार्यों में भी योगदान दिया है। वहीं, वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में भारत अफगानिस्तान के साथ अपने संबंधों को सावधानीपूर्वक आगे बढ़ा रहा है।
पाक सेना के इस बयान के बाद भारत-अफगानिस्तान संबंधों और पाकिस्तान की क्षेत्रीय रणनीति को लेकर चर्चा तेज हो गई है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मुद्दे पर दोनों देशों की ओर से और क्या प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं और क्षेत्रीय कूटनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)