प्याज के दाम में 15% उछाल, दिल्ली के लिए 800 टन की कांदा एक्सप्रेस
लासलगांव में प्याज 15% महंगा — देश की प्रमुख प्याज मंडी लासलगांव एपीएमसी में औसत थोक भाव 3,700 से बढ़कर 4,251 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया।
नई दिल्ली/नासिक: देशभर में प्याज की कीमतों में एक बार फिर तेज बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। महाराष्ट्र की लासलगांव एपीएमसी, जिसे देश की सबसे बड़ी प्याज मंडियों में गिना जाता है, वहां पिछले दो कारोबारी सत्रों में प्याज के औसत थोक भाव में करीब 15 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है। वहीं राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्याज का खुदरा भाव बढ़कर करीब 50 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। बढ़ती कीमतों और घटती आपूर्ति के बीच सरकार ने बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए बफर स्टॉक से 800 मीट्रिक टन प्याज दिल्ली भेजने का फैसला किया है। इसके लिए नासिक से मंगलवार को रेल के जरिए 'कांदा एक्सप्रेस' दिल्ली पहुंचेगी।
लासलगांव मंडी में 15% तक बढ़े दाम
महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित लासलगांव एपीएमसी में प्याज के थोक भाव में अचानक तेजी आई है। सोमवार को प्याज का औसत थोक भाव 4,251 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया, जबकि शुक्रवार को यही भाव 3,700 रुपये प्रति क्विंटल था। इस तरह महज दो कारोबारी सत्रों में औसत कीमत करीब 15 प्रतिशत बढ़ गई। सोमवार को प्याज का अधिकतम थोक भाव 4,545 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया। कारोबारियों के मुताबिक, कम आवक और लगातार बनी मांग इस तेजी की प्रमुख वजहों में शामिल हैं।
मंडी में प्याज की आवक हुई कम
लासलगांव एपीएमसी के अधिकारियों के मुताबिक, पिछले तीन से चार सप्ताह में मंडी में प्याज की आवक में काफी गिरावट आई है। पहले जहां रोजाना करीब 15,000 क्विंटल प्याज मंडी में पहुंच रहा था, वहीं अब यह घटकर लगभग 9,000 क्विंटल रह गया है। यानी मंडी में आने वाली प्याज की मात्रा में करीब 40 प्रतिशत तक की कमी आई है। आवक कम होने के कारण थोक बाजार में उपलब्धता प्रभावित हुई है और इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है।
दिल्ली में प्याज के दाम में 70% तक उछाल
प्याज की बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा असर दिल्ली के खुदरा बाजार में दिखाई दे रहा है। करीब दो सप्ताह पहले तक दिल्ली की मंडियों में प्याज 15 से 20 रुपये प्रति किलो के आसपास बिक रहा था। कुछ जगहों पर इसकी कीमत 20 से 25 रुपये और कभी-कभी 30 रुपये प्रति किलो तक पहुंचती थी। लेकिन अब दिल्ली में प्याज का भाव करीब 50 रुपये प्रति किलो हो गया है। इस हिसाब से दो सप्ताह के भीतर कीमतों में लगभग 70 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है।
खुदरा कीमत और बढ़ने की आशंका
दिल्ली के प्याज विक्रेताओं का कहना है कि मंडी में ही खरीद कीमत तेजी से बढ़ गई है। एक विक्रेता के मुताबिक, पहले वह 20 से 25 रुपये किलो में प्याज बेचता था और कभी-कभी कीमत 30 रुपये तक पहुंचती थी। लेकिन अब अगर मंडी से प्याज करीब 50 रुपये किलो में खरीदना पड़ रहा है तो खुदरा बाजार में इसे 60 से 62 रुपये किलो तक बेचना पड़ सकता है। कारोबारियों का मानना है कि अगर आने वाले दिनों में आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ तो खुदरा कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
आजादपुर मंडी में भी सप्लाई घटी
दिल्ली की आजादपुर मंडी में भी प्याज की आवक में भारी कमी आई है। कारोबारियों के मुताबिक, सामान्य दिनों में जहां करीब 100 ट्रक प्याज रोजाना मंडी में पहुंचते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर लगभग 40 ट्रक रह गई है। यानी मंडी में आने वाले ट्रकों की संख्या आधे से भी कम हो गई है। सप्लाई घटने और पुराने स्टॉक पर निर्भरता बढ़ने से बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है।
बारिश और फसल को नुकसान भी बड़ी वजह
प्याज की कीमतों में तेजी के पीछे लगातार बारिश को भी एक प्रमुख कारण बताया जा रहा है। किसानों और खरीदारों के मुताबिक, कई इलाकों में बारिश के कारण प्याज की खेती और फसल को नुकसान पहुंचा है। फसल प्रभावित होने की वजह से किसानों के पास बाजार में भेजने के लिए पर्याप्त मात्रा में प्याज उपलब्ध नहीं है। इसका असर मंडियों में आवक पर पड़ रहा है। नई फसल की सीमित उपलब्धता और पुराने स्टॉक के तेजी से इस्तेमाल होने के कारण बाजार में आपूर्ति का संतुलन बिगड़ गया है।
पुराना स्टॉक अब बन रहा है सहारा
मंडियों में नई आवक कम होने के कारण फिलहाल पुराने स्टॉक पर निर्भरता बढ़ गई है। लेकिन लगातार मांग बनी रहने से यह स्टॉक भी धीरे-धीरे कम हो रहा है। अगर नई फसल की आवक अपेक्षित गति से नहीं बढ़ी तो बाजार में प्याज की उपलब्धता और प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि कारोबारी आने वाले दिनों में कीमतों पर नजर बनाए हुए हैं।
कीमतों पर लगाम लगाने के लिए 'कांदा एक्सप्रेस'
बढ़ती कीमतों और घटती आपूर्ति के बीच केंद्र सरकार ने बफर स्टॉक का इस्तेमाल शुरू किया है। सरकारी एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक, करीब 800 मीट्रिक टन प्याज मंगलवार को रेल के जरिए नासिक से दिल्ली भेजा जा रहा है। इस विशेष रेल खेप को 'कांदा एक्सप्रेस' के नाम से भेजा जा रहा है। इसका उद्देश्य दिल्ली के बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ाना और बढ़ती खुदरा कीमतों पर नियंत्रण करना है।
दिल्ली पहुंचने के बाद क्या होगा?
800 मीट्रिक टन प्याज की खेप दिल्ली पहुंचने के बाद इसे बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार की कोशिश है कि अतिरिक्त सप्लाई के जरिए मंडियों में प्याज की कमी को कुछ हद तक दूर किया जाए। अगर सरकारी स्टॉक बाजार में पर्याप्त मात्रा में पहुंचता है और नियमित आपूर्ति बनी रहती है, तो कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। हालांकि, इसका असर खुदरा बाजार में कितनी जल्दी दिखाई देगा, यह आगे की आवक और मांग पर निर्भर करेगा।
सरकार की नजर सप्लाई और कीमतों पर
प्याज जैसी आवश्यक खाद्य वस्तु की कीमतों में अचानक तेजी का सीधा असर आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर पड़ता है। इसी वजह से केंद्र सरकार प्याज के बफर स्टॉक के जरिए बाजार में हस्तक्षेप कर रही है। 'कांदा एक्सप्रेस' के जरिए बड़े शहरों में प्याज पहुंचाने का मकसद उन इलाकों में आपूर्ति बढ़ाना है जहां कीमतों में तेजी अधिक दिखाई दे रही है। सरकार की कोशिश है कि सीमित समय में अतिरिक्त स्टॉक बाजार तक पहुंचाकर कीमतों को नियंत्रित किया जा सके।
आगे क्या रहेगा प्याज का भाव?
फिलहाल प्याज की कीमतों को लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। एक तरफ मंडियों में आवक कम है और दूसरी तरफ खुदरा बाजार में मांग बनी हुई है। बारिश से फसल प्रभावित होने और पुराने स्टॉक के घटने से आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में कीमतों का रुख काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि नई फसल की आवक कितनी तेजी से बढ़ती है और सरकार का बफर स्टॉक बाजार में कितनी मात्रा में उपलब्ध कराया जाता है।
अगर नासिक से दिल्ली पहुंचने वाली 800 मीट्रिक टन की 'कांदा एक्सप्रेस' खेप और आगे की सरकारी सप्लाई से बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ती है, तो कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है। लेकिन अगर मंडियों में आवक कम बनी रही और बारिश से प्रभावित फसल की भरपाई जल्द नहीं हुई, तो प्याज की कीमतों पर दबाव आगे भी जारी रह सकता है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)