पेपर लीक बिल पर अखिलेश का हमला, सरकार से संसद में तीखी बहस
लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान अखिलेश यादव ने सरकार पर शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक को लेकर तीखा हमला बोला, जबकि केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार की कार्रवाई का बचाव किया।
लोकसभा में 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख और सांसद अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। पेपर लीक के मुद्दे को लेकर उन्होंने सरकार की कार्यशैली, शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठाए। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली, जिसमें केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी सरकार का पक्ष रखते हुए विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया।
लोकसभा में अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए अखिलेश यादव ने पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब धर्मेंद्र प्रधान संसद पहुंचे तो एनडीए के सांसदों ने उनका स्वागत किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा लग रहा था मानो एनडीए सांसदों को किसी बड़े संकट से राहत मिल गई हो। अखिलेश ने कहा कि "एक 'प्रधान' को हटाकर, असल में 'प्रधानमंत्री' को बचा लिया गया।" उनके इस बयान पर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद से शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को कमजोर करने की लगातार कोशिशें की गई हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा और परीक्षाओं की विश्वसनीयता प्रभावित होने से युवाओं में असंतोष बढ़ता गया और यही नाराजगी बाद में बड़े छात्र आंदोलन का कारण बनी।
उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक विवाद के बाद केवल छात्र ही नहीं, बल्कि उनके परिवार भी आंदोलन के समर्थन में सामने आए। उनके अनुसार, छात्रों और अभिभावकों की एकजुटता के कारण यह आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर फैल गया और अंततः सरकार को दबाव में आकर फैसले लेने पड़े। अखिलेश यादव ने दावा किया कि देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी को छात्रों के दबाव के आगे झुकना पड़ा।
सपा प्रमुख ने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य में 20 से अधिक प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार होने वाले पेपर लीक से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है और सरकार इस समस्या को रोकने में पूरी तरह विफल रही है।
अपने भाषण के दौरान अखिलेश यादव ने राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित गड़बड़ी के आरोपों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, "जो लोग भगवान श्रीराम को दिए गए दान, चंदे और चढ़ावे की चोरी नहीं रोक पाए, वे पेपर लीक कैसे रोक सकते हैं?" उन्होंने इस टिप्पणी के जरिए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब तक व्यवस्था में बड़े स्तर पर सुधार नहीं होगा, तब तक ऐसी समस्याएं खत्म नहीं होंगी।
अखिलेश यादव ने आगे कहा कि सरकार केवल छात्रों के आंदोलन की वजह से नहीं, बल्कि अपने ही सांसदों की चिंता के कारण भी दबाव में आई। उनके अनुसार, जब सत्तारूढ़ दल के सांसदों को भी सरकार की स्थिरता को लेकर चिंता होने लगी, तब सरकार को अपनी रणनीति बदलनी पड़ी। उन्होंने कहा कि जब सांसद असहज महसूस करने लगते हैं, तो सरकार पर भी स्वाभाविक रूप से दबाव बढ़ जाता है।
अखिलेश यादव के आरोपों का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि यह तुलना की जानी चाहिए कि कौन-सी स्थिति बेहतर है—वह, जिसमें सरकार छात्रों की आवाज सुनकर संसद में नया कानून लेकर आती है, या वह, जिसमें विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए पूरे देश में आपातकाल (इमरजेंसी) जैसी स्थिति लागू कर दी जाती है। रिजिजू ने कहा कि वर्तमान सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत छात्रों की चिंताओं को सुनते हुए कानून बना रही है।
केंद्रीय मंत्री के इस बयान पर अखिलेश यादव ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं इमरजेंसी का दौर नहीं देखा, लेकिन उस समय जैसी परिस्थितियों की झलक हाल के दिनों में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में देखने को मिली। उन्होंने कहा कि असली समस्या कानून की नहीं, बल्कि सरकार की नीयत की है। उनके शब्दों में, "जिस दिन आपकी नीयत साफ हो जाएगी, उसी दिन परीक्षा की प्रक्रिया भी पूरी तरह पारदर्शी हो जाएगी।"
अखिलेश यादव ने अपने भाषण के अंत में कहा कि देश में परिवर्तन हमेशा जनआंदोलनों और जनता की आवाज से आया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह इमरजेंसी के बाद देश में राजनीतिक बदलाव आया था, उसी तरह भविष्य में भी बदलाव संभव है। उनके इस बयान के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक बार फिर तीखी बहस देखने को मिली।
लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर जारी चर्चा के दौरान सरकार और विपक्ष दोनों ने छात्रों के भविष्य, परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर अपनी-अपनी दलीलें रखीं। सरकार का कहना है कि यह विधेयक पेपर लीक और परीक्षा में होने वाली धांधली पर सख्त रोक लगाने के लिए लाया गया है, जबकि विपक्ष का आरोप है कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और राजनीतिक इच्छाशक्ति भी उतनी ही जरूरी है। ऐसे में यह बहस केवल एक विधेयक तक सीमित नहीं रही, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य पर व्यापक राजनीतिक विमर्श का रूप ले चुकी है।
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