नेपाल सरकार ने दी बड़ी जानकारी, तत्काल बड़ा खतरा नहीं; त्रिशूली में फिर शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन
नेपाल सरकार ने कहा- फिलहाल बड़े खतरे की आशंका नहीं, लेकिन एहतियात के तौर पर पूरे प्रशासन को अलर्ट रखा गया है।
नेपाल में विनाशकारी प्राकृतिक आपदा के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। सैकड़ों लोगों की मौत और बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के बीच अब एक बार फिर संभावित बाढ़ को लेकर चिंता बढ़ गई थी। तिब्बत की तरफ ग्लेशियर टूटने और पानी के ओवरफ्लो की खबरों के बाद नेपाल सरकार ने स्थिति को लेकर अहम जानकारी दी है। सरकार का कहना है कि फिलहाल तत्काल किसी बड़े खतरे की आशंका नहीं है, लेकिन एहतियात के तौर पर सभी को सतर्क रहने की जरूरत है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
नेपाल सरकार की जानकारी के मुताबिक, त्रिशूली नदी क्षेत्र में रेस्क्यू ऑपरेशन फिर से शुरू कर दिया गया है। नेपाल सेना के एक अधिकारी ने बताया कि नदी का जलस्तर करीब दो फीट तक बढ़ा है, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियां अतिरिक्त सावधानी बरत रही हैं। राहत और बचाव दलों को संभावित खतरे को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित तरीके से अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि मौजूदा स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और अगर पानी का स्तर तेजी से बढ़ता है तो तत्काल जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
सरकार ने कहा- फिलहाल कोई बड़ा खतरा नहीं
तिब्बत में ग्लेशियर टूटने और पानी के ओवरफ्लो होने की खबरों के बाद नेपाल में भी चिंता बढ़ गई थी। लोगों के बीच आशंका थी कि कहीं सीमा पार से अचानक भारी मात्रा में पानी नेपाल की नदियों में न पहुंच जाए। इस स्थिति को लेकर नेपाल सरकार के प्रवक्ता एवं शिक्षा मंत्री सस्मित पोखरेल ने कहा कि फिलहाल तत्काल किसी बड़े खतरे की स्थिति नहीं दिखाई दे रही है। हालांकि, उन्होंने लोगों से सावधानी बरतने और पूरी तरह सतर्क रहने की अपील की।
सरकार के मुताबिक, चीन की तरफ छोचेन खोला और पुरेपू त्सांग्पो नदी के संगम के पास बने बड़े तालाब से जुड़े क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने के कारण पानी के साथ गाद और मलबे के ओवरफ्लो की स्थिति बनी है। अधिकारियों का कहना है कि यह घटना चिंता का विषय जरूर है, लेकिन फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं है जिससे तत्काल बड़े पैमाने पर बाढ़ आने का खतरा दिखाई दे। इसके बावजूद नेपाल सरकार ने आपदा प्रबंधन से जुड़ी सभी एजेंसियों को अलर्ट रहने को कहा है।
त्रिशूली में फिर शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन
संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए कुछ समय के लिए राहत और बचाव अभियान प्रभावित हुआ था, लेकिन स्थिति का आकलन करने के बाद त्रिशूली क्षेत्र में रेस्क्यू ऑपरेशन दोबारा शुरू कर दिया गया है। नेपाल सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां नदी किनारे और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की तलाश कर रही हैं। मलबे में दबे लोगों और नदी में बह गए लोगों की तलाश के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
नेपाल सेना के अधिकारी ने बताया कि नदी का जलस्तर लगभग दो फीट बढ़ा है। हालांकि, फिलहाल स्थिति नियंत्रण से बाहर नहीं बताई गई है। सेना और पुलिस की टीमें नदी के जलस्तर, आसपास के इलाकों और संभावित मलबे के बहाव पर नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बचावकर्मियों की सुरक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
नुवाकोट में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया
संभावित दोबारा बाढ़ की आशंका के बीच नुवाकोट जिले के नदी तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों में भी चिंता बढ़ गई है। कई स्थानीय लोगों को एहतियात के तौर पर सुरक्षित स्थानों की ओर जाते हुए देखा गया। प्रशासन ने नदी के आसपास रहने वाले लोगों से सावधानी बरतने और जरूरत पड़ने पर तुरंत ऊंचे तथा सुरक्षित इलाकों में जाने की अपील की है।
नेपाल सरकार की ओर से राहत और बचाव अभियान में लगे सुरक्षाकर्मियों, रेस्क्यू टीमों और आम लोगों से भी सुरक्षित स्थानों पर रहने का अनुरोध किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि आपदा प्रभावित इलाकों में किसी भी तरह की अफवाह से बचना जरूरी है और केवल प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना चाहिए।
489 शव बरामद, बड़ी संख्या में लोगों की पहचान नहीं
नेपाल में आई इस भीषण प्राकृतिक आपदा में मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक अब तक 489 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि कई लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव दल अलग-अलग प्रभावित क्षेत्रों में शवों और लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं।
बरामद शवों की पहचान करना भी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बड़ी संख्या में शवों की अभी तक पहचान नहीं हो पाई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 449 शवों में से सिर्फ 100 की पहचान हो सकी है, जबकि 393 शवों की पहचान अभी नहीं हुई है। दुर्गम इलाकों में संपर्क टूटने और कई परिवारों के विस्थापित होने के कारण पहचान प्रक्रिया में समय लग रहा है।
290 भारतीयों से अभी तक संपर्क नहीं
नेपाल की इस प्राकृतिक आपदा का असर भारत पर भी पड़ा है। भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, 84 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचाया जा चुका है, लेकिन करीब 290 भारतीय नागरिकों से अभी तक संपर्क नहीं हो पाया है। भारतीय अधिकारी नेपाल प्रशासन के साथ समन्वय कर इन लोगों की स्थिति का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।
नेपाल में बड़ी संख्या में भारतीय पर्यटक, तीर्थयात्री, कर्मचारी और अन्य लोग अलग-अलग इलाकों में मौजूद रहते हैं। बाढ़ और भूस्खलन के कारण कई सड़कें और संपर्क मार्ग बाधित होने से लोगों तक पहुंचना मुश्किल हुआ है। ऐसे में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और उनके संपर्क में आने के प्रयास लगातार जारी हैं।
नई झील ने बढ़ाई चिंता
नेपाल सरकार के मुताबिक फिलहाल तत्काल कोई बड़ा खतरा नहीं है, लेकिन आपदा के बाद बनी नई प्राकृतिक झील चिंता का विषय बनी हुई है। पहाड़ों से बर्फ, चट्टानों और भारी मलबे के नीचे आने से नदी का रास्ता प्रभावित हुआ और पानी जमा होने लगा। इस तरह बनी झील या प्राकृतिक जलाशय सामान्य बांध की तरह स्थायी नहीं होता।
अगर इस प्राकृतिक बांध पर पानी का दबाव लगातार बढ़ता है और वह अचानक टूट जाता है, तो नीचे की ओर तेज गति से पानी, मलबा और बड़े पत्थर बह सकते हैं। ऐसी स्थिति में कुछ ही समय में फ्लैश फ्लड पैदा हो सकती है। इसी आशंका के कारण नेपाल और चीन की एजेंसियां लगातार जलस्तर और प्राकृतिक बांध की स्थिति पर नजर रख रही हैं।
ग्लेशियर टूटने से कैसे बनता है फ्लैश फ्लड का खतरा?
हिमालयी क्षेत्रों में जब ग्लेशियर, बर्फ या चट्टानों का बड़ा हिस्सा अचानक टूटकर नीचे गिरता है तो वह अपने साथ भारी मात्रा में मलबा लेकर आता है। अगर यह मलबा किसी नदी के रास्ते में जमा हो जाए तो नदी का प्राकृतिक प्रवाह कुछ समय के लिए रुक सकता है। इसके पीछे पानी जमा होने से एक अस्थायी झील या प्राकृतिक बांध बन जाता है।
जब पानी का दबाव इस प्राकृतिक अवरोध की क्षमता से अधिक हो जाता है, तो बांध अचानक टूट सकता है। इसके बाद पानी के साथ जमा मलबा, चट्टान और बर्फ बेहद तेज गति से नीचे की ओर बहते हैं। यही प्रक्रिया अचानक आने वाली फ्लैश फ्लड को बेहद विनाशकारी बना सकती है। नेपाल में हालिया आपदा के संदर्भ में भी वैज्ञानिक इसी तरह की घटनाओं की कड़ी की जांच कर रहे हैं।
पहले की तबाही ने छोड़ा भारी नुकसान
नेपाल में आई पहली विनाशकारी बाढ़ ने नदी किनारे के इलाकों में भारी तबाही मचाई। तेज पानी और मलबे के बहाव से सड़कें, पुल, घर और अन्य बुनियादी ढांचे क्षतिग्रस्त हुए। कई इलाकों का संपर्क दूसरे हिस्सों से कट गया और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में बचाव दलों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
हाइड्रोपावर परियोजनाएं भी इस आपदा से प्रभावित हुईं। कई स्थानों पर सुरंगों और परियोजना क्षेत्रों में लोग फंस गए थे, जिन्हें सेना और अन्य बचाव एजेंसियों ने सुरक्षित निकालने का प्रयास किया। आपदा के बाद भी कई दुर्गम क्षेत्रों में लापता लोगों की तलाश जारी है।
रेस्क्यू टीमों के सामने दोहरी चुनौती
नेपाल में राहत और बचाव दलों के सामने इस समय दोहरी चुनौती है। एक तरफ उन्हें पहले से लापता लोगों और शवों की तलाश करनी है, वहीं दूसरी तरफ संभावित नई बाढ़ से खुद को और स्थानीय लोगों को सुरक्षित रखना है। नदी के जलस्तर में अचानक बदलाव होने की आशंका के कारण बचावकर्मियों को लगातार सतर्क रहना पड़ रहा है।
सरकार का कहना है कि रेस्क्यू ऑपरेशन दोबारा शुरू कर दिया गया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि खतरा पूरी तरह खत्म हो गया है। प्रशासन संभावित जलस्तर वृद्धि और तिब्बत की तरफ होने वाली गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है। जरूरत पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की तैयारी भी रखी जा रही है।
आने वाले घंटे बेहद अहम
नेपाल सरकार की ओर से फिलहाल तत्काल बड़े खतरे से इनकार किया गया है, लेकिन अधिकारियों ने सावधानी बरतने की अपील की है। तिब्बत की तरफ ग्लेशियर टूटने और प्राकृतिक झील से पानी के ओवरफ्लो की स्थिति को देखते हुए आने वाले समय में नदी के जलस्तर में बदलाव पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
फिलहाल त्रिशूली में रेस्क्यू अभियान फिर शुरू हो चुका है और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट हैं। प्रशासन का जोर इस बात पर है कि किसी भी संभावित फ्लैश फ्लड की स्थिति में लोगों को पहले से सुरक्षित किया जा सके। वहीं, मलबे में दबे और लापता लोगों की तलाश भी जारी है। ऐसे में नेपाल के लिए आने वाले घंटे राहत और बचाव के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।
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